बंगाल चुनाव नतीजों पर मचा सियासी घमासान, ब्रजेश पाठक का पलटवार -चेहरा छुपा रहा विपक्ष

विपक्ष के आरोपों को बताया निराधार, कहा - तुष्टीकरण की राजनीति को जनता ने नकारा
Bureau 05 May 2026, 01:42 PM 1 min read
बंगाल चुनाव नतीजों पर मचा सियासी घमासान, ब्रजेश पाठक का पलटवार -चेहरा छुपा रहा विपक्ष

 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। चुनावी नतीजों पर विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पलटवार किया है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हार के बाद इस तरह के बयान देना केवल ‘चेहरा छुपाने’ की कोशिश है।

 

चुनाव परिणामों में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को झटका लगने के बाद विपक्षी दलों ने परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और गड़बड़ी की आशंका जताई है। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि विपक्ष जब चुनाव हारता है तो ईवीएम या प्रक्रिया पर सवाल उठाता है, जबकि जीत के समय उसे कोई खामी नजर नहीं आती। उन्होंने कहा, “विपक्ष जब हारता है तो ऐसी बातें करता है। यह केवल अपनी छवि बचाने का प्रयास है। तुष्टीकरण की राजनीति अब नहीं चलेगी। देश का युवा, महिलाएं, गरीब और किसान जाग चुके हैं और सीमित दायरे की राजनीति को स्वीकार नहीं कर रहे।”

 

ब्रजेश पाठक ने आगे दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी देशभर में मजबूत स्थिति में है और आने वाले चुनावों में भी पार्टी को व्यापक समर्थन मिलेगा। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2027 में भाजपा 2017 जैसा प्रदर्शन दोहराने में सक्षम होगी और प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।

 

उन्होंने विपक्ष की हार के पीछे महिला आरक्षण के विरोध को एक प्रमुख कारण बताया। पाठक के अनुसार, महिलाओं में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी देखी जा रही है, जिसका असर चुनावी परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखा है। वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव परिणामों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए ‘काला दिन’ बताया और आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ने केंद्रीय बलों का दुरुपयोग किया। बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है और विभिन्न दल अपनी-अपनी व्याख्या के साथ जनता के सामने आ रहे हैं।

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