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लखनऊ की भरवारा आरओबी परियोजना अदालत की निगरानी में, सरकार से जवाब तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एसआईए रिपोर्ट और भूमि अधिग्रहण अधिसूचना में विरोधाभास पर जताई चिंता, पुनर्वास संबंधी कानूनी प्रक्रिया पर मांगा विस्तृत जवाब।
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Bureau News Desk
05 Aug 2026
05:01 PM
1 min read
लखनऊ की भरवारा आरओबी परियोजना अदालत की निगरानी में, सरकार से जवाब तलब
हाइलाइट्स
भरवारा रेलवे ओवरब्रिज परियोजना के भूमि अधिग्रहण पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा।
अदालत ने विस्थापन और पुनर्वास प्रक्रिया के पालन पर सवाल उठाए।
एसआईए रिपोर्ट और भूमि अधिग्रहण अधिसूचना में विरोधाभास पर चिंता जताई गई।
छह जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई।

राजधानी लखनऊ की बहुप्रतीक्षित भरवारा रेलवे ओवरब्रिज परियोजना के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि प्रभावित परिवारों के न्यूनतम विस्थापन और उनके पुनर्वास से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया का समुचित पालन किए जाने को लेकर गंभीर प्रश्न उठते हैं।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने वैज्ञानिक स्वामी सत्यप्रकाश वेद विज्ञान सेवा समिति सहित छह जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। इन याचिकाओं में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और प्रभावित परिवारों के अधिकारों को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना में यह उल्लेख किया गया है कि किसी भी परिवार का विस्थापन नहीं होगा। वहीं सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) रिपोर्ट में कई परिवारों के प्रभावित और विस्थापित होने का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। अदालत ने इन दोनों दस्तावेजों में दिखाई दे रहे विरोधाभास को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से इस संबंध में स्पष्ट जवाब मांगा है।

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खंडपीठ ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी विकास परियोजना के कारण लोगों का विस्थापन होता है तो कानून के तहत पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। अदालत अब यह जानना चाहती है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान पुनर्वास और विस्थापन से जुड़े वैधानिक प्रावधानों का पालन किस प्रकार किया गया।

यह मामला वैज्ञानिक स्वामी सत्यप्रकाश वेद विज्ञान सेवा समिति सहित कुल छह जनहित याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों के अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की पर्याप्त अनदेखी की गई है। इसी आधार पर अदालत से अधिग्रहण प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में अपना विस्तृत पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार अदालत के समक्ष अपना जवाब दाखिल करेगी। इस सुनवाई में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और विस्थापन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आगे विचार किया जाएगा।

भरवारा रेलवे ओवरब्रिज परियोजना को लखनऊ की महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं में माना जाता है। परियोजना का उद्देश्य रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम को कम करना और आवागमन को सुगम बनाना है। हालांकि भूमि अधिग्रहण और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दों के कारण यह परियोजना न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गई है।

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