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सिर्फ ₹20 में बन रहा था नकली आधार, ₹15 में वोटर आईडी, दिल्ली पुलिस ने ऐसे पकड़ा ऑनलाइन फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क

साइबर पेट्रोलिंग के दौरान सामने आया मामला, जांच में नकली दस्तावेज़ों के जरिए असली पहचान पत्र बनवाने और अपडेट कराने के नेटवर्क की आशंका; एफआईआर दर्ज कर जांच तेज।
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Bureau News Desk
05 Jul 2026
02:40 PM
1 min read
सिर्फ ₹20 में बन रहा था नकली आधार, ₹15 में वोटर आईडी, दिल्ली पुलिस ने ऐसे पकड़ा ऑनलाइन फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क
इमेज सोर्स एआई
हाइलाइट्स
दिल्ली पुलिस ने कथित ऑनलाइन फर्जी दस्तावेज़ रैकेट का खुलासा किया।
शुरुआती जांच में ₹20 में नकली आधार और ₹15 में नकली वोटर आईडी बनाए जाने का दावा।
वेबसाइट पर कई प्रकार के सरकारी दस्तावेज़ तैयार करने की सुविधा होने की बात सामने आई।
परीक्षण के दौरान पुलिस ने खुद पोर्टल से आधार जैसा दस्तावेज़ तैयार कर जांच की।

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे कथित ऑनलाइन रैकेट का खुलासा किया है, जो बेहद कम कीमत पर नकली सरकारी दस्तावेज़ तैयार कर रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए कथित तौर पर ₹20 में नकली आधार कार्ड और ₹15 में नकली वोटर आईडी कार्ड बनाए जा रहे थे। पुलिस का कहना है कि इन दस्तावेज़ों का इस्तेमाल असली पहचान पत्र बनवाने या उनमें बदलाव कराने के लिए किए जाने की आशंका है। मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, नियमित साइबर पेट्रोलिंग और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की जानकारी मिली। शुरुआती जांच में एक ऐसे संगठित नेटवर्क का पता चला, जो कथित तौर पर फर्जी सरकारी दस्तावेज़ तैयार कर रहा था। पुलिस का मानना है कि इन दस्तावेज़ों का उपयोग पैन कार्ड सहित अन्य आधिकारिक पहचान पत्र प्राप्त करने या उनमें बदलाव कराने के लिए किया जा सकता था।

जांच में सामने आया कि संबंधित वेबसाइट पर कथित तौर पर निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, वोटर पहचान पत्र, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार से जुड़े दस्तावेज़ तथा अन्य सहायक रिकॉर्ड तैयार करने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही थी। पुलिस के अनुसार, ऑनलाइन भुगतान करने के बाद उपयोगकर्ता अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज कर दस्तावेज़ तैयार करा सकते थे। इसी प्रक्रिया के जरिए कथित तौर पर नकली पहचान संबंधी दस्तावेज़ बनाए जा रहे थे।

जांच के दौरान एक पुलिस अधिकारी ने फर्जी पहचान का उपयोग कर वेबसाइट पर खाता बनाया। इसके बाद भुगतान गेटवे के माध्यम से डिजिटल वॉलेट में ₹100 जमा किए गए और आधार कार्ड का विकल्प चुनकर फोटो तथा अन्य विवरण अपलोड किए गए। पुलिस का दावा है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद पोर्टल ने आधार कार्ड जैसा दिखने वाला दस्तावेज़ तैयार कर दिया।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, तैयार किए जा रहे नकली आधार और वोटर आईडी कार्ड का प्रारूप, डिज़ाइन और स्वरूप वास्तविक सरकारी दस्तावेज़ों से काफी मिलता-जुलता था। इनमें क्यूआर कोड और बारकोड भी शामिल किए गए थे, जिससे पहली नजर में इन्हें पहचानना आसान नहीं था।

हालांकि जांच के दौरान जब कार्ड पर मौजूद बारकोड को स्कैन किया गया तो उसमें सरकारी आधार डेटाबेस की जानकारी नहीं मिली। इसके बजाय केवल वही विवरण दिखाई दिए, जिन्हें दस्तावेज़ बनाते समय उपयोगकर्ता ने स्वयं दर्ज किया था।

पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल दिल्ली तक सीमित नहीं हो सकता और इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और वेबसाइट के संचालन, उससे जुड़े लोगों तथा नकली दस्तावेज़ों के संभावित उपयोग की जांच की जा रही है।

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