नई दिल्ली। अपराध कर विदेशों में छिपकर कानून से बच निकलने की कोशिश करने वाले गैंगस्टरों और आर्थिक अपराध के आरोपियों पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से वर्ष 2025 और 2026 के दौरान विदेशों में छिपे पांच बड़े वांछित अपराधियों को भारत लाने में सफलता हासिल की है। इनमें हत्या, रंगदारी, जानलेवा हमला और आर्थिक अपराध जैसे गंभीर मामलों में वांछित आरोपी शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने के लिए इंटरपोल के माध्यम से विभिन्न देशों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे अपराधियों का प्रत्यर्पण या डिपोर्टेशन कर उन्हें भारतीय अदालतों के सामने पेश करना है।
दिल्ली और आसपास के राज्यों में सक्रिय संगठित अपराध गिरोहों की गतिविधियों को देखते हुए भारतीय एजेंसियों ने अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, थाईलैंड और अन्य देशों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ाया है। अधिकारियों का कहना है कि विदेशों को सुरक्षित ठिकाना समझने वाले अपराधियों की पहचान कर उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया लगातार मजबूत की जा रही है।
इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद संबंधित देशों की एजेंसियों के साथ कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया पूरी कर डिपोर्टेशन और प्रत्यर्पण की कार्रवाई की जा रही है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 में तीन बड़े वांछित आरोपियों को भारत वापस लाया गया। इनमें दो आरोपियों को संयुक्त अरब अमीरात से डिपोर्ट कराया गया, जबकि एक आरोपी को थाईलैंड से वापस लाया गया।
आर्थिक अपराध शाखा के मामले में वांछित उदित खुल्लर के खिलाफ वर्ष 2024 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी। भारतीय एजेंसियों के अनुरोध पर यूएई की सुरक्षा एजेंसी ने 31 जुलाई 2025 को उसके डिपोर्टेशन की सूचना दी। इसके बाद उसे दुबई से भारत भेजा गया और 1 अगस्त 2025 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दिल्ली पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
स्पेशल सेल के मामले में वांछित रितिक बजाज गिरफ्तारी से बचने के लिए संयुक्त अरब अमीरात में रह रहा था। उसके खिलाफ वर्ष 2025 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस की विशेष एस्कॉर्ट टीम उसे 23 दिसंबर 2025 को भारत लेकर पहुंची।
स्पेशल सेल के मामले में वांछित हरसिमरन उर्फ बादल उर्फ सिमरन उर्फ काले के खिलाफ हत्या, रंगदारी और जानलेवा हमले सहित करीब 23 आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। जमानत मिलने के बाद वह कई मामलों में अदालत में पेश नहीं हो रहा था। भारतीय एजेंसियों और थाईलैंड के अधिकारियों के समन्वय से उसे बैंकॉक में हिरासत में लिया गया और 26 नवंबर 2025 को भारत डिपोर्ट कर दिया गया। वर्ष 2026 में भी विदेशों में छिपे वांछित अपराधियों के खिलाफ अभियान जारी रहा। इस दौरान दो और आरोपियों को भारत लाया गया।
आर्थिक अपराध शाखा के मामले में वांछित नवस कक्कट इस्माइल के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। यूएई सरकार द्वारा डिपोर्ट किए जाने के बाद उसे दिल्ली लाया गया, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
स्पेशल सेल के मामले में वांछित प्रभदीप सिंह के खिलाफ वर्ष 2023 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। अज़रबैजान में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस की विशेष एस्कॉर्ट टीम उसे 13 मई 2026 को भारत लेकर पहुंची।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि विदेशों में छिपे गैंगस्टरों और आर्थिक अपराध के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए इंटरपोल के जरिए विभिन्न देशों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे आरोपियों को भारतीय कानून के दायरे में लाना और लंबित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
क्या है रेड कॉर्नर नोटिस? रेड कॉर्नर नोटिस इंटरपोल द्वारा जारी किया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय अलर्ट होता है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों को किसी वांछित आरोपी की पहचान कर उसे हिरासत में लेने या कानूनी कार्रवाई के लिए जानकारी साझा करना होता है। हालांकि यह अपने आप में गिरफ्तारी वारंट नहीं होता, लेकिन प्रत्यर्पण या डिपोर्टेशन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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