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ग्लासगो से गूंजा भारत का नाम, गाजियाबाद की महिला दारोगा अस्मिता डे ने रचा इतिहास; जूडो में देश को दिलाया पहला राष्ट्रमंडल स्वर्ण

कनाडा की हाइडी क्वाच को रोमांचक फाइनल में हराया, गोल्डन स्कोर में दर्ज की जीत; राष्ट्रमंडल जूडो में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बनीं अस्मिता डे
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Bureau News Desk
01 Aug 2026
07:27 PM
1 min read
ग्लासगो से गूंजा भारत का नाम, गाजियाबाद की महिला दारोगा अस्मिता डे ने रचा इतिहास; जूडो में देश को दिलाया पहला राष्ट्रमंडल स्वर्ण
हाइलाइट्स
गाजियाबाद की महिला दारोगा अस्मिता डे ने राष्ट्रमंडल जूडो में स्वर्ण पदक जीता।
महिला 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में कनाडा की हाइडी क्वाच को हराया।
गोल्डन स्कोर में मिली जीत के साथ भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई।
अस्मिता डे राष्ट्रमंडल जूडो में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।

गाजियाबाद। स्कॉटलैंड के ग्लासगो से भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। गाजियाबाद में तैनात महिला दारोगा और अंतरराष्ट्रीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने राष्ट्रमंडल जूडो प्रतियोगिता के महिला 48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। इस जीत के साथ वह राष्ट्रमंडल जूडो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।

अस्मिता की इस उपलब्धि ने न केवल उत्तर प्रदेश पुलिस बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। फाइनल मुकाबले में उन्होंने कनाडा की खिलाड़ी हाइडी क्वाच को कड़े संघर्ष के बाद हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

महिला 48 किलोग्राम भार वर्ग का फाइनल मुकाबला शुरुआत से ही बेहद प्रतिस्पर्धी रहा। कनाडा की हाइडी क्वाच ने अस्मिता डे को कड़ी चुनौती दी और निर्धारित समय तक दोनों खिलाड़ियों के बीच कोई निर्णायक बढ़त नहीं बन सकी।

इसके बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर तक पहुंचा, जहां दबाव भरे क्षणों में अस्मिता डे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए निर्णायक अंक हासिल किया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया। इस जीत के साथ भारत ने राष्ट्रमंडल जूडो के इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित किया।

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फाइनल तक पहुंचने का अस्मिता डे का सफर भी प्रभावशाली रहा। उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल, क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में लगातार जीत दर्ज करते हुए खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उनका प्रदर्शन संतुलित और आत्मविश्वास से भरा रहा। निर्णायक मुकाबले में भी उन्होंने धैर्य बनाए रखा और गोल्डन स्कोर में जीत दर्ज कर अपने अभियान का शानदार समापन किया।

अस्मिता डे वर्तमान में गाजियाबाद पुलिस लाइन में तैनात हैं। इसी वर्ष मार्च में उन्हें दारोगा के पद पर पदोन्नत किया गया था। पुलिस सेवा के साथ-साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जूडो में लगातार अपनी पहचान बनाई है। अब राष्ट्रमंडल स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनका नाम भारतीय जूडो के इतिहास में दर्ज हो गया है।

अस्मिता डे की उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश पुलिस में भी खुशी का माहौल है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजकरन नैय्यर ने कहा कि अस्मिता डे ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस और गाजियाबाद का सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि उनकी यह उपलब्धि पुलिस बल के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

राष्ट्रमंडल जूडो प्रतियोगिता में भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अस्मिता डे इस प्रतियोगिता के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं। इससे भारतीय जूडो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है और महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है।

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