ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के एनर्जी मार्किट पर भी नजर आने लगा है। 1 अप्रैल से एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने की आशंका के बीच आम उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ गई है, हालांकि सरकार ने आपूर्ति को लेकर स्थिति सामान्य होने का दावा किया है।
इधर लॉकडाउन को लेकर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि देश में किसी तरह का लॉकडाउन लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है और इस तरह की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आश्वाशन दिया कि भारत के पास तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और अगले 60 दिनों के लिए आपूर्ति पहले ही सुरक्षित कर ली गई है।
सरकार के अनुसार भारत अब 41 से अधिक देशों से कच्चा तेल इम्पोर्ट कर रहा है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी संभावित परेशानी का प्रभाव सीमित रहता है। इसके बावजूद, वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
इधर, बाजार में पैनिक बाइंग का असर भी देखने को मिला है। कई स्थानों पर गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगने की जानकारी सामने आई है। तेल कंपनियों ने भी स्थिति को देखते हुए पेट्रोल पंप संचालकों के लिए क्रेडिट लिमिट बढ़ा दी है, ताकि आपूर्ति बाधित न हो।
भारतीय ओएमसी (ऑयल मार्केटिंग कंपनीज) हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं। मार्च 2026 में घरेलू सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी, जिसके बाद इसकी कीमत करीब 853 रुपये हो गई है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 1768.50 रुपये तक पहुंच चुकी है।
वैश्विक एनर्जी मार्किट में अस्थिरता के चलते 1 अप्रैल से कीमतों में और बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही सीएनजी और पीएनजी के दामों में भी संशोधन हो सकता है। सरकार ने आपूर्ति को लेकर स्थिति सामान्य बताई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच कीमतों पर नजर बनी हुई है।
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें