>लखनऊ के आशियाना थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत के दौरान एक युवक की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने पुलिस चौकी कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की है।
>परिजनों के अनुसार, आशियाना थाना क्षेत्र निवासी 28 वर्षीय मिथुन को चोरी के आरोप में 16 दिसंबर को पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि उसे बिना परिजनों को सूचना दिए 19 दिसंबर तक पुलिस चौकी में रखा गया। इस दौरान चौकी में मिथुन के साथ कथित रूप से मारपीट की गई, जिसमें सीने पर लातों, डंडों और बेल्ट से पीटने का आरोप लगाया गया है।
>परिजनों का कहना है कि पुलिस की पिटाई से मिथुन की हालत बिगड़ गई, लेकिन इलाज कराने के बजाय उसे आनन-फानन में जेल भेज दिया गया। डायल-112 पर संपर्क करने के बाद परिजनों को उसकी गिरफ्तारी की जानकारी मिली। 21 दिसंबर को मिथुन के भाई मनोज और प्रमोद जेल में उससे मिलने पहुंचे, जहां मिथुन ने कथित तौर पर अपने साथ हुई मारपीट की जानकारी दी। जेल में हालत बिगड़ने पर उसे बलरामपुर अस्पताल भेजा गया, जहां से ट्रॉमा सेंटर रेफर किए जाने के दौरान उसकी मौत हो गई।
>मिथुन रतनखंड इलाके में अनिल के मकान में लाइटिंग का काम कर रहा था और उसी दौरान हुई चोरी के मामले में उसे हिरासत में लिया गया था। मामले में परिजनों ने पुलिस पर हिरासत में पिटाई और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना को लेकर लखनऊ में पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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