राजधानी लखनऊ के बीबीडी थाना क्षेत्र के देवरिया-फसलोना और अइमा गांव से सटी इंदिरा नहर की सफाई के नाम पर कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्धारित सीमा से अधिक खुदाई कर करोड़ों रुपये की मिट्टी निकाली और बेची गई।
जानकारी के अनुसार, इंदिरा नहर की सफाई के लिए करीब छह महीने पहले टेंडर स्वीकृत किया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि नहर की सफाई के दौरान केवल चार फीट तक मिट्टी निकालने की अनुमति थी। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि कई ठेकेदारों की मिलीभगत से आठ से बारह फीट तक खुदाई की गई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नहर से लगी सिंचाई विभाग की करीब 15 बीघा सरकारी जमीन से भी मिट्टी निकालकर बेची गई। उनका दावा है कि पिछले छह महीनों से यह गतिविधि लगातार चल रही थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस मामले में कार्रवाई नहीं कर रहे थे।
मामले को लेकर भाजपा के सेमरा मंडल अध्यक्ष अक्षय मौर्य ने जिलाधिकारी को शिकायत पत्र सौंपा। इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को भी पत्र लिखकर कथित रूप से शामिल ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शिकायत के बाद बीते दिन एडीएम सिटी ने मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने एनडीवी टुडे से बातचीत में बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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