लखनऊ। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्लॉट खरीदकर घर बनाने का सपना देखने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। आरोप है कि शहर के कई इलाकों में भू-माफियाओं का संगठित नेटवर्क सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कराकर लोगों को प्लॉट बेच रहा है। कर्मचारी, व्यापारी और आम लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर जमीन खरीद रहे हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि जिस गाटा संख्या की रजिस्ट्री कराई गई, कब्जा उससे अलग सरकारी जमीन पर दिला दिया गया।
चिनहट क्षेत्र के हरदसिखेड़ा, कंचनपुर, मटियारी, गणेशपुर, धांवा और लोलाई गांवों में तालाब, बंजर और अन्य सरकारी जमीनों पर कब्जे के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि रजिस्ट्री किसी अन्य गाटा संख्या की कराई जाती है, जबकि वास्तविक कब्जा सरकारी भूमि पर कराया जाता है।

कार्रवाई न होने से बढ़ रहे भू-माफियाओं के हौसले: स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम, तहसील प्रशासन, सिंचाई विभाग और पुलिस को इन अवैध कब्जों की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही। यही वजह है कि अवैध कॉलोनियों का विस्तार लगातार बढ़ता जा रहा है और भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

एनडीवी टुडे लगातार हरदसिखेड़ा, कंचनपुर, मटियारी, गणेशपुर, धांवा और लोलाई गांवों में सरकारी जमीनों पर कब्जे के मामलों को उठा रहा है, लेकिन अब तक बड़े स्तर पर कार्रवाई नहीं हो सकी है।
देवा रोड क्षेत्र का मामला फिर चर्चा में: देवा रोड क्षेत्र का एक मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि नगर निगम ने पिछले वर्ष सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई की थी, लेकिन कुछ समय बाद फिर उसी जमीन पर कब्जा कर लिया गया। आरोप है कि अब उस भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर प्लॉटिंग की जा रही है और लोगों को कब्जा दिया जा रहा है।

2023 में दर्ज हुई थी रिपोर्ट: ऐसे ही एक मामले में वर्ष 2023 में चिनहट थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। कार्रवाई के दौरान रजिस्ट्री से जुड़े एक व्यक्ति को जेल भेजा गया, लेकिन पूरे नेटवर्क से जुड़े मुख्य लोगों तक जांच नहीं पहुंच सकी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी कारण अवैध कॉलोनियां बसाने का खेल लगातार जारी है।
गणेशपुर-रहमानपुर क्षेत्र में भी आरोप: गणेशपुर-रहमानपुर क्षेत्र में भी तालाब और बंजर जमीनों पर कब्जा कर मकान निर्माण कराने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यहां भी यह बात सामने आ रही है कि रजिस्ट्री किसी दूसरी जमीन की कराई जाती है और कब्जा सरकारी जमीन पर दिलाया जाता है।

किसान ने खोला मोर्चा: मामले में नया मोड़ तब आया जब सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों में घिरे एक किसान ने ही अन्य कब्जाधारकों और कथित भू-माफियाओं के खिलाफ शिकायतें शुरू कर दीं। किसान का दावा है कि उसकी जमीन पर भी अतिक्रमण किया जा रहा है। वह विभिन्न सरकारी कार्यालयों में पहुंचकर कथित अवैध कब्जों और जमीन बिक्री से जुड़े लोगों की जानकारी अधिकारियों को दे रहा है। किसान का कहना है कि वह अपनी ओर से कब्जा छोड़ने को तैयार है, लेकिन पूरे नेटवर्क और अन्य कब्जाधारकों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्लॉट खरीदने से पहले बरतें सावधानी: प्लॉट खरीदने से पहले संबंधित जमीन की गाटा संख्या, नक्शा, खतौनी और राजस्व अभिलेखों की अच्छी तरह जांच कर लें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि जिस जमीन की रजिस्ट्री हो रही है, कब्जा भी उसी भूमि पर मिल रहा है। अन्यथा भविष्य में कार्रवाई होने पर लोगों के आशियानों पर बुलडोजर चलने का खतरा बना रह सकता है।
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