राजधानी लखनऊ के चिनहट क्षेत्र में निवेश के नाम पर हुई लूट और धोखाधड़ी के मामले में जांच के दौरान नए खुलासे सामने आए हैं। फरार चल रहे सीआरपीएफ के दरोगा जय प्रकाश सिंह के खिलाफ अन्य आपराधिक मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं, मामले में लापरवाही और संदिग्ध भूमिका के आरोपों के बीच कमता चौकी प्रभारी मोहित कुमार को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, लूटकांड का खुलासा होने के बाद चिनहट पुलिस ने सीआरपीएफ दरोगा जय प्रकाश सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। प्रारंभिक जांच में उसके खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य मामलों के दर्ज होने की जानकारी मिली है। अब पुलिस संबंधित जिलों और थानों से संपर्क कर उसके खिलाफ दर्ज मामलों का पूरा ब्यौरा जुटा रही है, ताकि विस्तृत आपराधिक इतिहास तैयार किया जा सके।
जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि 11 जून को मामला तूल पकड़ने के बाद जय प्रकाश सिंह 13 जून को अपने कैंप पहुंचा और वहां से 20 दिन की छुट्टी लेकर चला गया। फिलहाल वह कहां है, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छुट्टी के दौरान वह किन स्थानों पर गया और उसके विभाग की ओर से उसके खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू की गई है या नहीं।
मामले में कार्रवाई करते हुए डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा ने रविवार देर शाम कमता चौकी प्रभारी मोहित कुमार को निलंबित कर दिया। बताया जा रहा है कि इंस्पेक्टर चिनहट दिनेश चंद्र मिश्रा ने उनकी भूमिका और कथित लापरवाही को लेकर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी थी। रिपोर्ट के आधार पर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। इस जांच की जिम्मेदारी एसीपी गोमतीनगर को सौंपी गई है।
जांच के दौरान गिरफ्तार सिपाही पूरन सिंह को लेकर भी कई जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उसने बड़ी संख्या में लोगों से उधार लिया था, जिनमें करीब 80 प्रतिशत पुलिसकर्मी बताए जा रहे हैं। बताया गया कि उसने किसी से 50 हजार रुपये तो किसी से एक लाख रुपये तक लिए थे। यह भी चर्चा है कि वह रकम कहीं निवेश करता था। कुछ लोगों द्वारा उसके सट्टेबाजी से जुड़े होने की बात भी कही जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले में पीएसी का एक बर्खास्त सिपाही भी शामिल था। पूछताछ में पूरन सिंह ने बताया कि उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए 'विनय' नाम का इस्तेमाल किया था। अब पुलिस उसकी वास्तविक पहचान, पूर्व तैनाती और सेवा से बर्खास्त किए जाने के कारणों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
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