लखनऊ में भीषण आग से तबाही, 2 मासूम बच्चियों के शव बरामद, 1000 से अधिक लोग बेघर

विकास नगर की झोपड़पट्टी में लगी आग से 280 से ज्यादा झोपड़ियां जलीं, सुबह सर्च ऑपरेशन में मिला शव
Bureau 16 Apr 2026, 10:38 AM 1 min read
लखनऊ में भीषण आग से तबाही, 2 मासूम बच्चियों के शव बरामद, 1000 से अधिक लोग बेघर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास नगर क्षेत्र में लगी भीषण आग के बाद गुरुवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान दो मासूम बच्चियों के शव बरामद किए गए। यह हादसा बुधवार शाम सेक्टर-11 की झोपड़पट्टी में हुआ, जहां 280 से अधिक झोपड़ियां जलकर राख हो गईं और 1000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए।

 

मृतकों की पहचान श्रुति (2 वर्ष) और उसकी दो माह की बहन के रूप में हुई है, जो बाराबंकी जिले के काशीपुरवा गांव निवासी एक श्रमिक परिवार की बेटियां थीं। पुलिस के अनुसार, आग पर काबू पाने के बाद गुरुवार सुबह तलाशी अभियान दोबारा शुरू किया गया, इसी दौरान मलबे से दोनों के जले हुए शव बरामद हुए।

 

अलोक कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने सुबह के समय गहन सर्च ऑपरेशन चलाया, ताकि लापता लोगों का पता लगाया जा सके। इसी दौरान दोनों बच्चियों के शव मिले, जिससे आशंका जताई जा रही है कि वे आग के दौरान झोपड़ी में फंस गई थीं।

 

आग बुधवार शाम करीब 5:30 बजे लगी और देखते ही देखते घनी आबादी वाली झोपड़पट्टी को अपनी चपेट में ले लिया। अधिकांश निवासी आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से आए प्रवासी मजदूर थे। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को अपने सामान बचाने या सभी सदस्यों के सुरक्षित निकलने का मौका नहीं मिल सका।

 

दमकल कार्य में बड़ी बाधा उस समय आई जब झोपड़ियों में रखे 50 से अधिक एलपीजी सिलेंडरों में विस्फोट होने लगे। लगातार हो रहे धमाकों के कारण आग और भड़क गई तथा राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हुआ।

 

शुरुआत में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई थी, क्योंकि अधिकांश लोग सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे थे। हालांकि रात में कुछ परिवारों ने अपने परिजनों के लापता होने की सूचना दी, जिसके बाद सुबह दोबारा सर्च अभियान चलाया गया।

 

पुलिस ने पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, घटना की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि कारणों और संभावित लापरवाही का पता लगाया जा सके।

 

जिला प्रशासन ने बताया कि यह बस्ती आवास विकास परिषद की जमीन पर अवैध रूप से बसी हुई थी। घटना के बाद प्रशासन ने राहत और पुनर्वास कार्य शुरू कर दिए हैं, जिसमें अस्थायी आश्रय, भोजन वितरण और प्रभावित परिवारों के नुकसान का आकलन शामिल है।

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