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एनसीईआरटी ने साइंस सिलेबस में जोड़ा दिनचर्या और समग्र स्वास्थ्य का ज्ञान

Education News: अब बच्चों की किताबों में सिर्फ रसायन और जीवविज्ञान नहीं, आयुर्वेद के सूत्र भी सिखाए जाएंगे।
News Desk
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30 Oct 2025
07:30 AM
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एनसीईआरटी ने साइंस सिलेबस में जोड़ा दिनचर्या और समग्र स्वास्थ्य का ज्ञान
हाइलाइट्स
Education News: अब बच्चों की किताबों में सिर्फ रसायन और जीवविज्ञान नहीं, आयुर्वेद के सूत्र भी सिखाए जाएंगे।


>भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद अब आधुनिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा बन चुकी है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने कक्षा 6 से 8 तक के विज्ञान पाठ्यक्रम में आयुर्वेद से जुड़े नए अध्याय जोड़े हैं। इन पाठों में छात्रों को दिनचर्या, ऋतुचर्या, आहार-विहार और समग्र स्वास्थ्य  के सिद्धांत सिखाए जाएंगे।


>एनसीईआरटी का यह कदम नई शिक्षा नीति के उस लक्ष्य को आगे बढ़ाता है जिसमें भारतीय परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर जोर दिया गया है।


>एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि इस बदलाव का उद्देश्य होलिस्टिक एजुकेशन यानी समग्र शिक्षा को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद केवल उपचार प्रणाली नहीं बल्कि एक जीवनशैली है जो शरीर, मन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की सीख देती है। कक्षा 8 की नई साइंस बुक ‘Curiosity’ में एक पूरा अध्याय इसी पर आधारित है, जिसमें छात्रों को बताया गया है कि संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और मानसिक शांति कैसे स्वस्थ जीवन की कुंजी हैं।


>पाठ्यक्रम में क्या-क्या जोड़ा गया है?


    >
  • कक्षा 6: ‘अष्टांग हृदय सूत्र स्थान’ से प्रेरित आयुर्वेदिक सिद्धांत, पदार्थों के वर्गीकरण और “बीस विरोधी गुणों” (गुरु-लघु, शीत-उष्ण आदि) की जानकारी।

  • कक्षा 7-8: शरीर और प्रकृति के बीच संतुलन, पौष्टिक भोजन, मौसमी दिनचर्या और रोगों की रोकथाम पर अध्याय।

  • छात्रों को यह भी सिखाया जाएगा कि कैसे शरीर की प्राकृतिक प्रवृत्तियों को समझकर रोगों से बचाव किया जा सकता है।


>एनसीईआरटी के साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) भी उच्च शिक्षा में आयुर्वेद आधारित कोर्स शुरू करने की तैयारी में है। आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी स्तर तक एकीकृत पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है ताकि छात्र आयुर्वेद को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझ सकें।


>शिक्षकों के लिए वर्कशॉप, हैंडबुक और ओरिएंटेशन सत्र भी शुरू किए जाएंगे ताकि वे विद्यार्थियों को परंपरागत ज्ञान को आधुनिक उदाहरणों से जोड़कर सिखा सकें। गोवा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पहले से ही भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा से जोड़ा जा चुका है, और अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा रहा है।

 

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