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स्टेशन पर एस्केलेटर बंद मिला तो वजह सिर्फ खराबी नहीं! कैग रिपोर्ट में अहम बात

कैग रिपोर्ट में एस्केलेटर के संचालन में बाधा डालने का उल्लेख, रेलवे ने बड़े स्टेशनों पर निगरानी और जांच बढ़ाई।
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Bureau News Desk
13 Sep 2026
06:16 PM
1 min read
स्टेशन पर एस्केलेटर बंद मिला तो वजह सिर्फ खराबी नहीं! कैग रिपोर्ट में अहम बात
हाइलाइट्स
कैग रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर एस्केलेटर के संचालन में बाधा से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में अहमदाबाद रेलवे स्टेशन का उदाहरण दिया गया है।
एस्केलेटर के पास सीसीटीवी कवरेज सुनिश्चित करने की प्रक्रिया चल रही है।
रेल मदद एप पर ट्रेन के आने-जाने के समय एस्केलेटर बंद रहने की शिकायतें मिलने की जानकारी दी गई है।

नई दिल्ली। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए लगाए गए एस्केलेटर और लिफ्ट के संचालन को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। स्टेशनों पर एस्केलेटर बंद रहने की शिकायतों के बीच भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की रिपोर्ट में एस्केलेटर के संचालन में बाहरी हस्तक्षेप का मामला सामने आने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में अहमदाबाद रेलवे स्टेशन का उदाहरण भी दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में कुलियों द्वारा एस्केलेटर को जानबूझकर बंद कराने की बात सामने आई, ताकि यात्रियों को सामान ले जाने के लिए उनकी सेवा लेने की जरूरत पड़े। रेल मदद एप पर भी ट्रेन के आगमन और प्रस्थान के समय एस्केलेटर बंद रहने से संबंधित शिकायतें दर्ज होने की बात कही गई है। इन शिकायतों और कैग रिपोर्ट में सामने आए बिंदुओं के बाद रेलवे ने स्टेशनों पर एस्केलेटर और लिफ्ट के संचालन की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सभी प्रमुख स्टेशनों पर यह सुनिश्चित करने की प्रक्रिया चल रही है कि एस्केलेटर और लिफ्ट सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहें।

रेलवे स्टेशनों पर एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने के लिए एस्केलेटर और लिफ्ट लगाए गए हैं। खासतौर पर बड़े और अधिक व्यस्त स्टेशनों पर इन सुविधाओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में यात्री करते हैं। हालांकि, कई स्टेशनों पर एस्केलेटर के बंद रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। किसी एस्केलेटर के बंद होने की सामान्य वजह तकनीकी खराबी हो सकती है, लेकिन कैग रिपोर्ट में ऐसे मामलों का भी उल्लेख किया गया है जिनमें एस्केलेटर के संचालन में जानबूझकर बाधा डालने की बात सामने आई। रेलवे के लिए इस तरह की शिकायत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एस्केलेटर यात्रियों को सीढ़ियों के मुकाबले प्लेटफार्मों के बीच आवाजाही का आसान विकल्प उपलब्ध कराते हैं। इनके बंद रहने पर यात्रियों को सीढ़ियों या अन्य साधनों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

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कैग रिपोर्ट में अहमदाबाद रेलवे स्टेशन से संबंधित एक मामले का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित रेलवे अधिकारियों ने यह स्वीकार किया कि एस्केलेटर के संचालन से जुड़े चाबी के स्लॉट के साथ छेड़छाड़ कर उसे बाधित किया जा सकता है। रिपोर्ट में सामने आए इस मामले से एस्केलेटर के संचालन और निगरानी व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। यदि किसी एस्केलेटर को तकनीकी खराबी के बजाय किसी अन्य वजह से बंद किया जाता है और इसकी तत्काल जानकारी संबंधित कर्मचारियों को नहीं मिलती, तो यात्रियों को असुविधा हो सकती है। इसी वजह से रेलवे ने एस्केलेटर के संचालन पर निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है।

एस्केलेटर बंद होने से संबंधित निगरानी में एक चुनौती यह भी सामने आई कि कई स्टेशनों पर एस्केलेटर के आसपास सीसीटीवी कैमरों की पर्याप्त कवरेज नहीं थी। सीसीटीवी निगरानी नहीं होने की स्थिति में यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि कोई एस्केलेटर तकनीकी खराबी के कारण बंद हुआ है या किसी बाहरी हस्तक्षेप के कारण। इसी को देखते हुए रेलवे अब यह सुनिश्चित कर रहा है कि स्टेशनों पर लगे एस्केलेटर और लिफ्ट सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहें। इस व्यवस्था के तहत एस्केलेटर के संचालन पर नजर रखने के साथ-साथ किसी तरह की गड़बड़ी होने पर संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया को भी मजबूत किया जा रहा है।

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रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के समय एस्केलेटर बंद होने की शिकायतें रेल मदद एप के माध्यम से भी प्राप्त होती हैं। रेल मदद एप पर यात्रियों द्वारा दर्ज शिकायतों के आधार पर रेलवे को स्टेशन पर मौजूद सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं की जानकारी मिलती है। एस्केलेटर के मामले में भी शिकायत मिलने के बाद संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाती है। रेलवे की ओर से स्टेशनों पर तैनात कर्मचारियों को एस्केलेटर और लिफ्ट के संचालन की निगरानी करने के लिए कहा गया है। यदि कोई उपकरण तकनीकी खराबी के कारण बंद होता है, तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारी को देने के निर्देश हैं, ताकि समस्या का समाधान जल्द किया जा सके।

उत्तर रेलवे ने स्टेशनों पर तैनात कर्मचारियों को एस्केलेटर और लिफ्ट के संचालन पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहें। यदि किसी एस्केलेटर में खराबी आती है तो उसे केवल बंद छोड़ने के बजाय संबंधित अधिकारी को इसकी जानकारी देने और समस्या के समाधान की प्रक्रिया शुरू करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही स्टेशनों पर एस्केलेटर और लिफ्ट की सीसीटीवी कवरेज सुनिश्चित करने का काम भी किया जा रहा है।

रेलवे की ओर से नई दिल्ली, आनंद विहार सहित बड़े स्टेशनों पर काम करने वाले कुलियों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। इसके लिए गुप्त जांच किए जाने की बात सामने आई है। यह निगरानी केवल एस्केलेटर से संबंधित शिकायतों तक सीमित नहीं है। यात्रियों से निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लिए जाने के मामलों पर भी कार्रवाई की गई है। हाल ही में अधिक पैसे लेने के मामले में 13 लाइसेंसधारी कुलियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है। त्योहारों के दौरान रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए निगरानी और जांच को और बढ़ाने की बात कही गई है।

रेलवे की ओर से कुलियों द्वारा सामान ले जाने के लिए निर्धारित शुल्क भी तय किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 40 किलोग्राम तक के सामान के लिए 20 मिनट की सेवा का निर्धारित शुल्क 140 रुपये है। निर्धारित शुल्क से अधिक राशि लेने की शिकायतों पर रेलवे द्वारा कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में 13 लाइसेंसधारी कुलियों के खिलाफ अधिक पैसे लेने के मामले में कार्रवाई की गई। यात्रियों के लिए निर्धारित शुल्क और सेवा से संबंधित नियमों की जानकारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे वे अतिरिक्त राशि की मांग किए जाने की स्थिति में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

एस्केलेटर के पास सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता को रेलवे निगरानी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है। कैमरों की कवरेज होने से एस्केलेटर के संचालन पर नजर रखना और किसी घटना की स्थिति में उसकी जांच करना आसान हो सकता है। इसी वजह से सभी स्टेशनों पर यह सुनिश्चित करने की प्रक्रिया चल रही है कि एस्केलेटर और लिफ्ट सीसीटीवी कवरेज में रहें। जहां एस्केलेटर बंद होने की शिकायत आती है, वहां यह पता लगाना जरूरी है कि इसका कारण तकनीकी खराबी था या किसी अन्य वजह से उसे बंद किया गया। कर्मचारियों को इसी तरह की स्थितियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

एस्केलेटर और लिफ्ट जैसी यात्री सुविधाओं से संबंधित शिकायतें रेल मदद एप के माध्यम से रेलवे तक पहुंचाई जा सकती हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एस्केलेटर बंद रहने से जुड़ी शिकायतें भी इस माध्यम से सामने आई हैं। ट्रेन के आगमन और प्रस्थान के दौरान यदि एस्केलेटर बंद मिलता है, तो यात्रियों को इससे परेशानी हो सकती है। ऐसी शिकायतों को संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। रेलवे की ओर से कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी उपकरण के खराब होने पर इसकी सूचना संबंधित अधिकारी को दी जाए, जिससे आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

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