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UP News: यूपी में ‘रूल ऑफ माफिया’ नहीं, ‘रूल ऑफ लाॅ’ लागू, लोहिया लाॅ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में बोले CM योगी

UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए।
Bureau
Bureau News Desk
17 Oct 2026
01:51 PM
1 min read
UP News: यूपी में ‘रूल ऑफ माफिया’ नहीं, ‘रूल ऑफ लाॅ’ लागू, लोहिया लाॅ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में बोले CM योगी
सोर्स-फाइल फोटो
हाइलाइट्स
लोहिया लाॅ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर बोला हमला
न्यायपालिका की प्रमुख हस्तियां समारोह में रहीं मौजूद
सीएम योगी का बयान: 2017 से पहले यूपी में था माफिया राज
दूसरों के जीवन में बदलाव से तय होगी सफलता

UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर सीएम योगी ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर पिछली सरकारों पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कानून के राज की जगह माफियाओं का प्रभाव था। राज्य ‘रूल ऑफ माफिया’ से मुक्त हो चुका है। यूपी में अब ‘रूल ऑफ लॉ’ लागू है। वर्तमान सरकार ने कानून का राज स्थापित करने यूपी की छवि बदली है।

इस अवसर पर उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अगर अन्याय सामने हो तो चुप रहना कतई विकल्प नहीं होना चाहिए। फैसला इतिहास सुना देगा, लेकिन अन्याय को लेकर बहस तो आपको ही करनी होगी। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री ने मेधावियों को पदक देकर सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के साथ ही 25 जून 1975 भी देश के लोकतंत्र की अहम तारीख है। आपातकाल ने ‘रूल ऑफ लॉ’ और ‘रूलर ऑफ लॉ’ के बीच का अंतर समझाया। मुख्यमंत्री ने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख भी किया और कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया गया फैसला इतिहास में दर्ज हो जाता है।

युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ इस सूत्र वाक्य को चैंबर की दीवार नहीं, युवा अधिवक्ता अपने हृदय में उतारें। सत्य वचन और हमेशा अध्ययन अधिवक्ता के जीवन का आधार है। साल 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवा अधिवक्ताओं की भूमिका होगी। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एआई का भी जिक्र किया और कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से काम आसान हो सकता है, लेकिन अंतिम फैसला व्यक्ति को अपने विवेक से ही लेना चाहिए। लापरवाह मसौदे से किसी निर्दोष व्यक्ति को अपनी आजादी गंवानी पड़ सकती है। उन्होंने आगे कहा कि डीपफेक और साइबर अपराधों ने साक्ष्यों की विश्वसनीयता की चुनौती में डाल दिया है। राज्य के 75 जनपदों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किये गये हैं।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अन्याय के सामने डट करने खड़े रहने और निरंतर अध्ययन करने रहने की सीख दी। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद को सुलझने के लिए गलत काम का दबाव आए तो सिद्धांतों से कभी भी समझौता न करें। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने इस अवसर पर कहा कि उपाधि मंजिल नहीं, नई यात्रा का प्रारंभ है। शिक्षा हासिल करने के बाद वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय से बाहर होती है। शिक्षा की वास्तविक सफलता का आकलन इससे होगा कि विद्यार्थी दूसरों के जीवन में कितना बदलाव लाते हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि विधि शिक्षा में विश्वविद्यालय का विशेष स्थान है। संस्थान ने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा में योगदान दिया है। इस अवसर पर विवि के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने कहा कि 20 वर्षों में विश्वविद्यालय ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से ज्यादा अधिकारी दिए हैं। यहां से शिक्षा हासिल करने वाले विधि विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। 

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