>उत्तर प्रदेश का संभल जिला इन दिनों सुर्ख़ियों में है। वजह है हाल ही में आई तीन सदस्यीय न्यायिक समिति की 450 पन्नों की जांच रिपोर्ट, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा गया है। इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं—खासतौर पर जिले की जनसंख्या संरचना और सांप्रदायिक संतुलन को लेकर।
>अगर 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर गौर करें तो संभल जिले का कुल क्षेत्रफल 2453.30 वर्ग किलोमीटर था।
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कुल जनसंख्या – 21,92,933
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पुरुष – 11,61,093
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महिला – 10,31,840
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कुल परिवार – 3,60,419
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नगर पंचायतें – 5
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ग्राम पंचायतें – 556
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नगरपालिकाएं – 3
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कुल गांव – 993
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>इन आंकड़ों से साफ है कि जिले की डेमोग्राफी पिछले दशक में कई बदलावों से गुज़री है।
>रिपोर्ट में कहा गया है कि 1947 में जहां संभल में 45% हिंदू परिवार रहते थे, वहीं 2025 में उनकी संख्या घटकर मात्र 15% रह गई है। वहीं मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़कर अब 85% के आसपास पहुंच गया है।
>जांच रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि संभल जिले में आज़ादी के बाद से अब तक 15 बड़े दंगे हो चुके हैं। इनमें साल 1947, 1948, 1953, 1958, 1962, 1976, 1978, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001 और 2019 शामिल हैं।
>सबसे गंभीर खुलासा यह है कि रिपोर्ट में संभल को आतंकी संगठनों के अड्डे के तौर पर चिन्हित किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि अलकायदा और हरकत-उल-मुजाहिद्दीन जैसे संगठन यहां सक्रिय हो चुके हैं।
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