>डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का दावा करने वाले ट्रंप इस बार रूस-यूक्रेन जंग में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी हाई-प्रोफाइल मुलाकात को युद्धविराम की दिशा में अहम माना जा रहा था, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट निकली।
>15 अगस्त 2025 को अलास्का में हुई ट्रंप-पुतिन मुलाकात को नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा था। ट्रंप ने दावा किया था कि रूस उनकी अपील पर युद्ध रोक देगा और अगर नहीं माना तो “गंभीर नतीजे” भुगतने होंगे। लेकिन मीटिंग के अगले ही दिन रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर दिए।
>16 अगस्त को हुए हमले में यूक्रेन ने रूस पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का आरोप लगाया। इसके बाद रूस ने 20-21 अगस्त को अब तक के तीसरे सबसे बड़े हमले को अंजाम दिया जिसमें 500 से अधिक ड्रोन और 40 मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया।
28 अगस्त को रूस ने कीव पर हमला करते हुए 629 ड्रोन्स और मिसाइल दागीं। इस हमले में यूरोपीय यूनियन की इमारत को भी नुकसान पहुंचा। जवाबी कार्रवाई में यूक्रेन ने भी रूस पर पलटवार किया।
>ट्रंप ने इस मुलाकात को “प्रोडक्टिव” करार दिया था और कहा था कि कई मुद्दों पर प्रगति हुई है। लेकिन जमीन पर हालात और खराब हो गए। जिस मीटिंग को युद्धविराम की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा था, उसने साबित कर दिया कि ट्रंप की डिप्लोमेसी न तो पुतिन पर असर डाल पाई और न ही रूस-यूक्रेन युद्ध को थाम पाई।
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