>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में प्रदेश प्रशासन, कृषि वित्त और सांस्कृतिक धरोहर—तीनों मोर्चों पर बड़े निर्णय लिए गए। सबसे प्रमुख फैसला पीसीएस (जे) भर्ती परीक्षा के पाठ्यक्रम में व्यापक संशोधन से जुड़ा है, ताकि कानूनों में होने वाले ताज़ा बदलाव सीधे परीक्षा ढाँचे में शामिल हो सकें। इसके साथ ही राज्य सरकार ने किसानों के लिए दीर्घकालीन वित्तीय सहायता की राह आसान करते हुए सरकारी सहकारी ग्राम विकास बैंक को नाबार्ड से 600 करोड़ रुपये ऋण उपलब्ध कराने हेतु 1500 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी को स्वीकृति दी है। तीसरा महत्वपूर्ण निर्णय प्रदेश की धरोहर-संपदा की रक्षा से जुड़ा है—ऐतिहासिक व प्राचीन अभिलेखों को संरक्षित करने के लिए ‘लोक अभिलेख अधिनियम’ प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।
>ये तीनों फैसले मिलकर न्यायिक सेवा की गुणवत्ता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और सांस्कृतिक विरासत के वैज्ञानिक संरक्षण की दिशा में एक समन्वित शासन दृष्टि को रेखांकित करते हैं।
>1. पीसीएस (जे) भर्ती पाठ्यक्रम में संशोधन: अब कानूनों के अद्यतन संस्करण होंगे आधार
>उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा नियमावली, 2001 में संशोधन को स्वीकृति देते हुए पीसीएस (जे) परीक्षा के पाठ्यक्रम को आधुनिक और गतिशील बनाने का निर्णय लिया है। केंद्र व राज्य स्तर पर लागू नए कानूनों—जैसे भारतीय दंड संहिता (IPC) के स्थान पर लागू भारतीय न्याय संहिता—को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाएगा। इसी प्रकार अन्य प्रतिस्थापित या संशोधित अधिनियमों को भी अपडेटेड रूप में शामिल किया जाएगा।
>परीक्षा संरचना को "लाइव" रखने का उद्देश्य यह है कि भविष्य में जब भी किसी कानून में संशोधन हो, उसे पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए बार-बार नियमावली में बदलाव न करना पड़े। इसके लिए सरकार ने उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा (षष्ठम संशोधन) नियमावली-2025 को मंजूरी दी है। इससे न्यायिक सेवा में आने वाले प्रशिक्षु न्यायाधीश नए विधायी ढाँचे के अनुरूप तैयार होंगे—जो न्याय वितरण की गुणवत्ता और गति दोनों को प्रभावित करेगा।
>2. किसानों को दीर्घकालीन सहारा: नाबार्ड से 600 करोड़, राज्य की 1500 करोड़ की गारंटी
>राज्य के सहकारी ग्राम विकास बैंक के ज़रिये किसानों को लंबे कार्यकाल (दीर्घ अवधि) वाले ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को मजबूत करने हेतु कैबिनेट ने महत्वपूर्ण वित्तीय कदम उठाया है। प्रस्ताव के अनुसार:
-
नाबार्ड से 600 करोड़ रुपये का ऋण बैंक को उपलब्ध कराया जाएगा।
-
इसके बदले उत्तर प्रदेश सरकार 1500 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देगी।
-
सहकारी ग्राम विकास बैंक स्वयं के संसाधनों से पर्याप्त ऋण नहीं बाँट पाता; इसलिए सरकारी गारंटी से उसे सस्ता पुनर्वित्त (refinance) मिल सकेगा।
>
>इस धन से किसानों को खेती, सिंचाई, कृषि यंत्र, भूमि सुधार, पशुपालन और कृषि आधारित पूंजीगत निवेश जैसे कार्यों के लिए दीर्घकालीन ऋण दिए जा सकेंगे। निर्णय का खास लाभ लघु व सीमांत किसानों तक पहुँचने की अपेक्षा की जा रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी और कृषि उत्पादकता में वृद्धि का रास्ता खुलेगा।
>3. इतिहास को दस्तावेज़ी सुरक्षा: ‘लोक अभिलेख अधिनियम’ का प्रस्ताव मंजूर
>प्रदेश की सांस्कृतिक-सांस्थानिक स्मृति को संरक्षित करने की दिशा में सरकार ने एक दूरदर्शी कदम उठाया है। कैबिनेट ने ऐतिहासिक एवं प्राचीन अभिलेखों को व्यवस्थित रूप से सुरक्षित, वर्गीकृत व संरक्षित करने हेतु ‘लोक अभिलेख अधिनियम’ के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। संस्कृति विभाग ने अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन कर यह प्रस्ताव तैयार किया था।
>क्यों महत्वपूर्ण है यह अधिनियम?
-
ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के डिजिटलीकरण, संरक्षण और सूचीकरण की प्रक्रिया संस्थागत होगी।
-
शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और विद्यार्थियों को प्रामाणिक अभिलेखीय स्रोत सुलभ होंगे।
-
पुरानी संपत्तियों, धार्मिक स्थलों या धरोहरों पर होने वाले कानूनी विवादों के निपटारे में अभिलेखीय साक्ष्य निर्णायक भूमिका निभा सकेंगे।
>
>यह निर्णय संकेत देता है कि शासन अब सांस्कृतिक विरासत को प्रशासनिक प्राथमिकताओं में ऊपर रखने को तैयार है—सिर्फ निर्माण नहीं, दस्तावेज़ी संरक्षण भी विकास का हिस्सा है।
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें