>उत्तर प्रदेश फार्मा और मेड-टेक सेक्टर में बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। प्रदेश सरकार के सहयोग से उत्तर प्रदेश प्रोमोट फार्मा काउंसिल और राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइपर), रायबरेली ने दवा अनुसंधान और चिकित्सा उपकरणों के विकास के लिए समझौता किया है। इस एमओयू से हर वर्ष 500 से अधिक छात्रों को शोध एवं प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा, जिससे राज्य में फार्मा और बायोटेक उद्योग को नई दिशा मिलेगी।
>कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि यह पहल प्रदेश को फार्मा और मेड-टेक क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस साझेदारी से न केवल दवा अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा बल्कि चिकित्सा उपकरणों के निर्माण और नवाचार में भी गति आएगी।
>प्रोमोट फार्मा काउंसिल की प्रबंध निदेशक कृतिका शर्मा और नाइपर की निदेशक प्रो. सुभिनी ए. सराफ ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। कृतिका शर्मा ने बताया कि इससे पहले भी आईआईटी बीएचयू और ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएचएसआइटी) के साथ एमओयू हो चुके हैं, और अब नाइपर से जुड़ने से दवा एवं चिकित्सा उपकरणों के अनुसंधान में और मजबूती मिलेगी।
>प्रो. सुभिनी सराफ ने कहा कि नाइपर में हर साल लगभग 90 शोध छात्र और 120 परास्नातक विद्यार्थी निकलते हैं। इस साझेदारी से उनके शोध कार्य सीधे समाज और उद्योग तक पहुंच सकेंगे। वहीं चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि जल्द ही एक संयुक्त समिति गठित कर प्रमुख परियोजनाओं पर काम शुरू किया जाएगा।
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