नई दिल्ली। एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान एआई2379 में 4 अगस्त को उड़ान के दौरान अचानक करीब 300 फीट की ऊंचाई कम होने और 17 यात्रियों एवं चालक दल के सदस्यों के घायल होने के मामले में जांच जारी है। घटना के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विमानन नियामक डीजीसीए की निगरानी बढ़ गई है।
इसी सिलसिले में एयर इंडिया के पद छोड़ रहे मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैंपबेल विल्सन ने मंगलवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में घटना और जारी जांच की स्थिति को लेकर जानकारी साझा की गई। विल्सन ने बैठक के बाद कहा कि उन्होंने जांच की स्थिति को लेकर अधिकारियों को अपडेट दिया है। आगे की जानकारी देने का निर्णय नागरिक उड्डयन मंत्री पर निर्भर है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना की जांच में विमान निर्माता एयरबस और फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी बीईए भी एएआईबी की सहायता करेंगी।
एयर इंडिया की एआई2379 उड़ान 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। विमान में 137 यात्री और आठ चालक दल के सदस्य सवार थे। उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक करीब 300 फीट की कमी दर्ज की गई। विमान बाद में स्थिर हुआ और सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंचा। घटना के दौरान केबिन में मौजूद कुछ यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को चोटें आईं। दिल्ली पहुंचने के बाद 13 यात्रियों और चार केबिन क्रू सदस्यों को अस्पताल ले जाया गया। हालिया रिपोर्टों में भी विमान के करीब 300 फीट नीचे आने और 17 लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है।
घटना के शुरुआती चरण में एयर इंडिया ने इसे कुछ समय के लिए हुई टर्बुलेंस से जुड़ी घटना बताया था। एयरलाइन के अनुसार, इसके कारण विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव आया था। हालांकि, बाद में विमानन नियामक डीजीसीए ने मामले को गंभीर घटना की श्रेणी में रखा और इसकी जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो यानी एएआईबी को सौंप दी। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक कमी किन परिस्थितियों में हुई और उस समय विमान के सिस्टम तथा चालक दल की स्थिति क्या थी।
जांच के लिए विमान का फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर सुरक्षित कर लिया गया है। इन रिकॉर्डरों से उड़ान के दौरान विमान की गति, ऊंचाई, विभिन्न प्रणालियों के प्रदर्शन और कॉकपिट में हुई बातचीत से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। जांच एजेंसियां इन रिकॉर्डरों के साथ विमान के तकनीकी सिस्टम और उड़ान से जुड़े अन्य उपलब्ध आंकड़ों का भी अध्ययन करेंगी। विमान निर्माता एयरबस के विशेषज्ञ और फ्रांस की बीईए भी जांच में सहयोग करने वाली हैं। बीईए और एयरबस की टीम के दिल्ली पहुंचकर जांच में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
दिल्ली में विमान के उतरने के बाद 13 यात्रियों और चार केबिन क्रू सदस्यों को अस्पताल ले जाया गया था। एयरलाइन की ओर से बाद में बताया गया कि कुछ यात्रियों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि अन्य को चिकित्सा निगरानी में रखा गया था। घटना के दौरान विमान के केबिन में यात्रियों को अचानक तेज झटके महसूस होने की जानकारी भी सामने आई। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में केबिन के अंदर हुए नुकसान और यात्रियों को चिकित्सा सहायता दिए जाने के दृश्य दिखाई दिए। हालांकि, घटना के कारण को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
घटना के बाद विमान में संभावित तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर कई रिपोर्ट सामने आई हैं। इनमें ऑटोपायलट के डिस्कनेक्ट होने और हाइड्रोलिक प्रणाली से जुड़ी संभावित समस्या की बातें शामिल हैं। हालांकि, इन तकनीकी गड़बड़ियों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले इन्हें विमान की ऊंचाई में कमी का कारण नहीं माना जा सकता। जांचकर्ता विमान के तकनीकी रिकॉर्ड, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और अन्य उपलब्ध जानकारी का अध्ययन करेंगे। इसके बाद ही घटना के दौरान विमान में वास्तव में क्या हुआ, इसका क्रम स्पष्ट हो सकेगा।
घटना के बाद विमान के दोनों पायलटों का अनिवार्य साइकोएक्टिव पदार्थ स्क्रीनिंग परीक्षण कराया गया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, कमांडिंग पायलट की शुरुआती स्क्रीनिंग रिपोर्ट में आगे पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच की आवश्यकता बताई गई है। इसकी अंतिम प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार है। डीजीसीए ने जांच पूरी होने तक दोनों पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया है। इस कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि उड़ान के समय चालक दल की स्थिति और संबंधित प्रक्रियाएं क्या थीं।
कैंपबेल विल्सन की नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए के वरिष्ठ अधिकारियों से हुई बैठक को एआई2379 घटना की जारी जांच के संदर्भ में देखा जा रहा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय एयर इंडिया से जुड़े व्यापक सुरक्षा और संचालन संबंधी मुद्दों की भी समीक्षा कर रहा है। इसमें विमान संचालन की विश्वसनीयता, सुरक्षा निगरानी और ऐसी घटनाओं से निपटने की एयरलाइन की व्यवस्था जैसे पहलू शामिल हैं। विल्सन ने अधिकारियों से मुलाकात के बाद जांच की स्थिति को लेकर अपडेट दिए जाने की बात कही। उन्होंने आगे की जानकारी देने का निर्णय नागरिक उड्डयन मंत्री पर निर्भर बताया।
एआई2379 की जांच ऐसे समय में हो रही है जब एयर इंडिया में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया भी चल रही है। कैंपबेल विल्सन ने अप्रैल में अपने पद से इस्तीफा दिया था और उनका नोटिस पीरियड 30 सितंबर को पूरा होना है। एयर इंडिया ने उनके स्थान पर इथियोपियन एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख टेवोल्डे गेबरियाम को जिम्मेदारी देने की घोषणा की है। हालांकि, उनके औपचारिक रूप से मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद संभालने की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। इस बीच विल्सन पद छोड़ने से पहले एयरलाइन के संचालन और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार तथा नियामक अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं।
एयर इंडिया पहले से ही विमानन सुरक्षा और संचालन से जुड़े मामलों में नियामकीय निगरानी के दायरे में रही है। पिछले साल हुए अहमदाबाद-लंदन विमान हादसे के बाद एयरलाइन के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी जांच और समीक्षा की गई थी। एआई2379 की घटना उसी व्यापक पृष्ठभूमि में सामने आई है। हालांकि, फुकेत-दिल्ली उड़ान की घटना और अहमदाबाद हादसे के बीच किसी संबंध का उल्लेख जांच एजेंसियों की ओर से नहीं किया गया है। इस मामले में वर्तमान जांच का मुख्य उद्देश्य 4 अगस्त को एआई2379 उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक आई कमी और उससे जुड़े घटनाक्रम का पता लगाना है।
एएआईबी की जांच में एयरबस और फ्रांस की बीईए के विशेषज्ञों के सहयोग की जानकारी सामने आई है। विमान निर्माता और विदेशी दुर्घटना जांच एजेंसी की भागीदारी से विमान के तकनीकी और संचालन संबंधी पहलुओं की जांच की जाएगी। जांचकर्ता विमान के रिकॉर्डर, तकनीकी प्रणालियों, चालक दल से संबंधित जानकारी और उपलब्ध उड़ान आंकड़ों को एक साथ रखकर घटना का क्रम तैयार करेंगे। जब तक जांच पूरी नहीं होती, ऑटोपायलट, हाइड्रोलिक प्रणाली या किसी अन्य तकनीकी समस्या को घटना का निश्चित कारण बताना उचित नहीं होगा।