पूर्वी उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार को नई दिशा देने की कोशिश शुक्रवार को उस समय देखने को मिली, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया पहुंचकर 456 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 106 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। कार्यक्रम केवल नई परियोजनाओं के शुभारंभ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके मंच से विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और भविष्य की योजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण संदेश भी दिए गए।
कार्यक्रम बरहज और रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्रों पर केंद्रित था, लेकिन मुख्यमंत्री के संबोधन का दायरा पूरे पूर्वांचल के विकास मॉडल तक फैला हुआ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार प्रदेश में तेज गति से विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है और इसका लाभ प्रदेश के हर जिले तक पहुंच रहा है।
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लेकिन इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी चर्चा केवल परियोजनाओं की संख्या नहीं रही। मुख्यमंत्री ने देवरिया की सड़क और परिवहन व्यवस्था को भविष्य के विकास की आधारशिला बताते हुए कई ऐसी योजनाओं का उल्लेख किया, जिनका सीधा असर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि पौना, कसया, पत्थरदेवा, सोनू घाट और बरहज को जोड़ने वाली सड़क परियोजनाओं के साथ-साथ उत्तर-दक्षिण संपर्क को मजबूत करने के लिए हाटा, गौरी बाजार, रुद्रपुर और कौड़ीराम मार्ग पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि बेहतर सड़कें केवल आवागमन नहीं बदलतीं, बल्कि निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी लेकर आती हैं।
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यहीं से मुख्यमंत्री ने विकास की चर्चा को युवाओं की ओर मोड़ दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं की स्किलिंग के साथ उन्हें रोजगार से जोड़ने का काम कर रही है। उनके अनुसार अब तक नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी से जोड़ा जा चुका है, जबकि पारंपरिक उद्यमों को पुनर्जीवित कर करोड़ों लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार किए गए हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत बिना गारंटी और ब्याज मुक्त ऋण जैसी योजनाओं का भी उन्होंने उल्लेख किया।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने पूर्वांचल की बदलती तस्वीर को एक्सप्रेस-वे और नई कनेक्टिविटी से जोड़ते हुए कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर ही तेज विकास की सबसे बड़ी शर्त है। उन्होंने बताया कि मोहन सेतु के निर्माण के लिए सरकार धनराशि स्वीकृत कर चुकी है, जबकि सोनू घाट से बरहज तक नया मार्ग तैयार होने के बाद क्षेत्र की आवाजाही और आसान होगी।
हालांकि कार्यक्रम का सबसे दूरगामी संकेत तब मिला, जब मुख्यमंत्री ने बरहज को भविष्य की इनलैंड वॉटर-वे कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या से जुड़ने वाले जलमार्ग का एक प्रमुख केंद्र बरहज भी बन सकता है। यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो किसानों की सब्जियां, फल, फूल, खाद्यान्न और मिलेट्स जलमार्ग के जरिए बड़े बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तक पहुंच सकेंगे।
विकास योजनाओं के साथ मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 6.18 लाख नए आवास स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही गरीबों को आवास, आयुष्मान कार्ड, शौचालय और निःशुल्क राशन जैसी सुविधाओं को सरकार की प्राथमिकता बताया।
कार्यक्रम के अंतिम हिस्से में मुख्यमंत्री ने अयोध्या से जुड़े हालिया विवादों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उनका कहना था कि बिना पुष्ट तथ्यों के आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए और यदि किसी के पास प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसी को सौंपना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनआस्था से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
देवरिया में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संकेत दिया कि सरकार पूर्वांचल में इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, रोजगार और सामाजिक योजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जिन परियोजनाओं और घोषणाओं की आधारशिला रखी गई है, वे जमीन पर कितनी तेजी से आकार लेती हैं।