लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय परिसर में बुधवार को हॉस्टल और मेस की व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों की नाराजगी सामने आई। बड़ी संख्या में छात्र विधि संकाय के गेट के बाहर एकत्र हुए और अपनी समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से समाधान की मांग की। छात्रों ने हॉस्टल और मेस से जुड़ी व्यवस्थाओं में सुधार तथा शिकायतों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
बुधवार सुबह हॉस्टल और मेस से जुड़ी समस्याओं को लेकर छात्रों के बीच नाराजगी देखने को मिली। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र विधि संकाय परिसर के बाहर पहुंचने लगे। कुछ ही समय में गेट के बाहर छात्रों की संख्या बढ़ गई। प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हाथों में अपनी मांगों से संबंधित पोस्टर थे। छात्रों ने अपनी समस्याओं को लेकर नारेबाजी भी की और विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। छात्रों का कहना था कि हॉस्टल और मेस से जुड़ी समस्याओं का असर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से शिकायतों को सुनने और उनके समाधान के लिए स्पष्ट कदम उठाने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं और वहां उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए। छात्रों के अनुसार, हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों ने हॉस्टल की बुनियादी व्यवस्थाओं की समीक्षा कराने की मांग की। उनका कहना था कि विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होने से परेशानी बनी हुई है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से हॉस्टल की मौजूदा व्यवस्थाओं की जांच कराने और सामने आ रही शिकायतों का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की।
हॉस्टल के साथ-साथ मेस व्यवस्था को लेकर भी छात्रों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारी छात्रों ने मेस संचालन और वहां उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए। छात्रों का कहना है कि मेस से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए बेहतर और व्यवस्थित मेस सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। छात्रों ने मेस व्यवस्था की निगरानी किए जाने की भी मांग रखी। इसके साथ ही उन्होंने मेस से संबंधित शिकायतों की जांच कराने और कमियों के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों की प्रमुख मांगों में हॉस्टल और मेस से जुड़ी समस्याओं का समाधान शामिल रहा। छात्रों ने प्रशासन से कहा कि उनकी शिकायतों को केवल सुना ही नहीं जाए, बल्कि उन्हें दूर करने के लिए स्पष्ट कार्रवाई भी की जाए। छात्रों ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं की समीक्षा कराने और मेस संचालन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की मांग की। उनका कहना था कि विद्यार्थियों से संबंधित शिकायतों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई की जरूरत है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन से अधिकारियों के साथ बातचीत कर समस्याओं का समाधान निकालने की भी मांग की।
विरोध के दौरान विधि संकाय के गेट के बाहर छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती गई। सैकड़ों छात्रों के एकत्र होने से परिसर के आसपास गहमागहमी का माहौल रहा। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों का कहना था कि हॉस्टल और मेस की समस्याएं केवल कुछ विद्यार्थियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हॉस्टल में रहने वाले बड़ी संख्या में छात्रों से संबंधित हैं। इसी आधार पर छात्रों ने प्रशासन से सभी संबंधित शिकायतों को एक साथ लेकर व्यवस्थाओं की समीक्षा करने की मांग की।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से हॉस्टल और मेस से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं में जो भी कमियां हैं, उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। छात्रों ने यह भी मांग की कि शिकायतों पर हुई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाए। उनके अनुसार, समस्याओं के समाधान के लिए केवल आश्वासन के बजाय स्पष्ट और व्यावहारिक कदम उठाए जाने चाहिए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों की ओर से अधिकारियों के साथ वार्ता और समस्याओं के समाधान की मांग भी उठाई गई।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह सवाल भी उठाया कि हॉस्टल और मेस से जुड़ी शिकायतों के सामने आने के बावजूद व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं हुआ। छात्रों ने प्रशासन से शिकायतों पर अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना था कि हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान होना चाहिए। छात्रों ने कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
सैकड़ों छात्रों के विधि संकाय के बाहर एकत्र होने के दौरान परिसर में गहमागहमी बनी रही। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई। प्रदर्शन के दौरान छात्रों की ओर से हॉस्टल और मेस की व्यवस्थाओं में सुधार, शिकायतों की समीक्षा और समस्याओं के समाधान की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।