नंदीग्राम-रेजीनगर उपचुनाव से पहले SIR पर अर्जेंट सुनवाई नहीं, 5 अक्टूबर की तारीख

28 Sep 2026

नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026: पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को तत्काल सुनवाई की मांग की गई। मामला नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से जुड़ा था। अदालत के समक्ष दलील दी गई कि बड़ी संख्या में अपीलें अभी लंबित हैं और संबंधित मतदाताओं को पहले भी मतदान का अवसर नहीं मिल पाया था।

मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने रखा गया। पीठ ने सुनवाई की तारीख को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया और कहा कि मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "ये सिर्फ उपचुनाव हैं।"

सुनवाई के दौरान वकील की ओर से अदालत को बताया गया कि मामला पहले 29 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन अब यह उस दिन की सूची में नहीं है। उन्होंने बताया कि मामले की अगली तारीख 5 अक्टूबर दिखाई जा रही है, जबकि नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर को होना है।

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वकील ने अदालत से मामले को इससे पहले सुनने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ बड़ी संख्या में अपीलें लंबित हैं और इन मामलों में कुछ लोग पिछले विधानसभा चुनाव में भी मतदान नहीं कर पाए थे। अदालत ने हालांकि सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाने के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। मामले की सुनवाई अब 5 अक्टूबर को होने की बात कही गई है। यानी नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को मतदान से एक दिन पहले इस मामले पर सुनवाई होगी।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के बाद बड़ी संख्या में नामों को लेकर विवाद सामने आया। मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों को अपने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपील का रास्ता दिया गया। इन अपीलों की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अपीलीय न्यायाधिकरण बनाए गए। इन न्यायाधिकरणों के सामने बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। अगस्त में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 38 लाख अपीलों में से केवल लगभग 2 प्रतिशत मामलों का ही निपटारा हुआ था।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार, 7 अगस्त तक 82,782 अपीलों पर फैसला हुआ था। इनमें 75,443 मामलों में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने का फैसला हुआ, जबकि 7,339 मामलों में नाम शामिल नहीं किए गए। इस आंकड़े के मुताबिक, उस समय तक कुल 37,27,838 अपीलें लंबित थीं। यानी लगभग 97.83 प्रतिशत अपीलों पर फैसला बाकी था।

अपीलीय न्यायाधिकरणों के सामने जिन मामलों पर फैसला हुआ, उनमें 75,443 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने का आदेश दिया गया। वहीं 7,339 मामलों में नाम शामिल नहीं किए गए। उपलब्ध आरटीआई आंकड़ों के अनुसार, निपटाए गए मामलों में करीब 91 प्रतिशत फैसलों में मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करने का निर्णय हुआ।

इन आंकड़ों को लेकर SIR से संबंधित मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पहले भी हुई है। अदालत ने लंबित अपीलों की स्थिति और उनके निपटारे से संबंधित जानकारी मांगी थी। अगस्त में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने चुनाव आयोग से लंबित मामलों और उनके निपटारे की स्थिति का विवरण उपलब्ध कराने को कहा था।

अर्जेंट सुनवाई की मांग की मुख्य वजह 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाला उपचुनाव है। वकील ने अदालत में कहा कि बड़ी संख्या में अपीलें अभी लंबित हैं और संबंधित मतदाता पहले हुए विधानसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सके थे।

सुनवाई के दौरान वकील ने अदालत को यह भी बताया कि कुछ लोग दूसरी बार मतदान से वंचित हो सकते हैं। इसी आधार पर मामले को 5 अक्टूबर से पहले सुनने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने तारीख आगे बढ़ाने से इनकार किया और 5 अक्टूबर को सुनवाई तय रखी। नंदीग्राम और रेजीनगर में मतदान 6 अक्टूबर को होना है। दोनों सीटों के उपचुनाव के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाने हैं।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के SIR को लेकर मामला पहले भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। मई में अदालत ने मतदाता सूची के SIR की प्रक्रिया संचालित करने की निर्वाचन आयोग की शक्ति को बरकरार रखा था। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि निर्वाचन आयोग किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता की जांच कर सकता है, लेकिन मतदाता सूची में नाम शामिल करने के संदर्भ में निर्धारित कानूनी शर्तों के आधार पर। अदालत के अनुसार, यदि आयोग को किसी व्यक्ति के मतदाता सूची में शामिल होने की वैधानिक पात्रता पर संतुष्टि नहीं होती है, तो संबंधित मामले को कानून के अनुसार निर्णय के लिए केंद्र सरकार के सक्षम अधिकारी के पास भेजा जा सकता है। इससे SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में नाम शामिल करने की पात्रता के बीच कानूनी प्रक्रिया को लेकर अदालत का रुख स्पष्ट हुआ था।

SIR से जुड़ी अपीलों की स्थिति को लेकर सितंबर में निर्वाचन आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जानकारी में भी बड़ी संख्या में लंबित मामलों का उल्लेख सामने आया। 18 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया था कि पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित 38.20 लाख अपीलों में से लगभग 1.02 लाख मामलों का निपटारा किया गया था।

बाद की रिपोर्टिंग में आयोग की ओर से 38.31 लाख अपीलों और करीब 1.26 लाख निपटाए गए मामलों का आंकड़ा सामने आया। उपलब्ध आंकड़ों में तारीख और अपीलों की श्रेणी के अनुसार अंतर है, इसलिए अलग-अलग समय पर उपलब्ध आंकड़ों को उसी तारीख के संदर्भ में देखना जरूरी है।

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को निर्धारित हैं। इन चुनावों से पहले SIR से संबंधित लंबित अपीलों की स्थिति एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में उठी। अदालत ने सोमवार को अर्जेंट सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। अब इस मामले पर 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इसके बाद मामले में अदालत के समक्ष लंबित अपीलों और उनसे जुड़े अन्य मुद्दों पर आगे की कार्यवाही होगी।