सोने और चांदी की कीमतों में रोजाना होने वाले बदलाव का असर बाजार और ग्राहकों की दिलचस्पी पर भी पड़ता है। पिछले कुछ समय में कीमती धातुओं के भाव में तेजी के बीच सोमवार को चांदी के बाजार से एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया। कारोबार के दौरान चांदी की कीमत में हजारों रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद एक किलो चांदी का भाव एक नए स्तर पर पहुंच गया।
सोमवार, 28 सितंबर 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर चांदी के दिसंबर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में गिरावट दर्ज की गई। दोपहर करीब 12 बजकर 36 मिनट पर दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स ₹2,27,494 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था। यह पिछले क्लोजिंग भाव ₹2,34,696 प्रति किलोग्राम की तुलना में ₹7,202 कम था। इस तरह चांदी के दिसंबर फ्यूचर्स में करीब 3.07 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। गिरावट के बाद चांदी का भाव ₹2.28 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे आ गया।
28 सितंबर को दोपहर 12:36 बजे उपलब्ध एमसीएक्स आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स का भाव ₹2,27,494 प्रति किलोग्राम था।
| विवरण | कीमत |
|---|---|
| पिछला क्लोजिंग भाव | ₹2,34,696 प्रति किलोग्राम |
| 28 सितंबर का भाव | ₹2,27,494 प्रति किलोग्राम |
| गिरावट | ₹7,202 |
| गिरावट प्रतिशत | 3.07% |
यह आंकड़ा एमसीएक्स के दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट से संबंधित है। स्थानीय सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत अलग हो सकती है। चांदी की कीमत में आई गिरावट के पीछे वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं में बिकवाली को एक प्रमुख कारण बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बाजार में ब्याज दरों, ट्रेजरी यील्ड, महंगाई और अमेरिकी डॉलर से जुड़े कारकों का असर कीमती धातुओं पर पड़ा है। कीमती धातुओं की कीमतों पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है। जब बाजार में ब्याज दरों को लेकर अपेक्षाएं बदलती हैं या बॉन्ड यील्ड में बदलाव होता है, तो निवेशकों के बीच सोने और चांदी जैसे ब्याज रहित एसेट्स को लेकर मांग प्रभावित हो सकती है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण महंगाई को लेकर दबाव बना हुआ है। ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। खाने-पीने के सामान समेत विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच महंगाई बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक बनी हुई है। ऐसी परिस्थितियों में केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर संबंधी नीतियों और आगे के संकेतों पर बाजार की नजर रहती है। चांदी समेत कीमती धातुओं की कीमतें भी इन व्यापक आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं।
चांदी की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के संदर्भ में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़ी अपेक्षाएं भी महत्वपूर्ण हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से आने वाले समय में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से जुड़े संकेतों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। ब्याज दरें अधिक रहने की स्थिति में ऐसे निवेश विकल्पों की तुलना में कीमती धातुओं पर दबाव पड़ सकता है, जिनसे ब्याज या यील्ड प्राप्त होती है। इसी वजह से ब्याज दरों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में होने वाले बदलाव को सोने और चांदी के बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
चांदी की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती का भी प्रभाव पड़ता है। चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमत आमतौर पर डॉलर में निर्धारित होती है। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी मुद्राओं में कमाई या भुगतान करने वाले खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत वाली कीमती धातुएं अपेक्षाकृत महंगी हो सकती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय मांग पर असर पड़ने की संभावना रहती है। 28 सितंबर को चांदी की कीमत में आई गिरावट के पीछे मजबूत डॉलर को भी एक कारक के रूप में देखा जा रहा है।
सोने और चांदी के बाजार में कीमतों का निर्धारण केवल घरेलू मांग से नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियां, डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों की दिशा, बॉन्ड यील्ड और निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे कई कारक कीमतों को प्रभावित करते हैं। मौजूदा मामले में उपलब्ध जानकारी के अनुसार कीमती धातुओं में बड़े पैमाने पर बिकवाली के बीच चांदी के भाव में गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर दिसंबर फ्यूचर्स में 3.07 फीसदी की कमी इसी कारोबारी दबाव को दर्शाती है।
चांदी का इस्तेमाल आभूषणों के अलावा औद्योगिक जरूरतों और निवेश के लिए भी किया जाता है। इसलिए इसके भाव में बदलाव का असर अलग-अलग प्रकार के खरीदारों पर अलग तरीके से पड़ सकता है। हालांकि, एमसीएक्स पर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट का भाव और स्थानीय बाजार में मिलने वाली भौतिक चांदी की कीमत एक जैसी होना जरूरी नहीं है। स्थानीय कीमत में शुद्धता, जीएसटी, मेकिंग चार्ज, स्थानीय बाजार की स्थिति और अन्य लागतों का प्रभाव हो सकता है। इसलिए एमसीएक्स पर दर्ज भाव को चांदी की भौतिक खरीद के अंतिम भुगतान के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
28 सितंबर को आई गिरावट के बाद चांदी की कीमतों की आगे की दिशा को लेकर स्पष्ट तस्वीर उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है। कीमती धातुओं की कीमतें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड, महंगाई और बाजार में खरीद-बिक्री जैसे कई कारकों से प्रभावित होती हैं। इन कारकों में बदलाव के साथ चांदी के भाव में भी उतार-चढ़ाव हो सकता है। फिलहाल 28 सितंबर के उपलब्ध एमसीएक्स आंकड़ों में दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स ₹2,27,494 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले क्लोजिंग भाव से ₹7,202 कम है।
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