>उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जन-जागरूकता और जनभागीदारी का आंदोलन बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन 2025’ के अंतर्गत राज्य ने 22 मार्च से 13 जून 2025 के बीच 1.66 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्यों को पूर्ण या प्रगति के पथ पर पहुंचा दिया है। यह अभियान वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वनरोपण जैसी बहुआयामी रणनीतियों के जरिए जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
जल संचयन की दिशा में तेज़ प्रगति
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जुड़े 17,557 कार्य पूर्ण और 16,561 कार्य प्रगति पर हैं।
- मनरेगा के तहत पारंपरिक जल स्रोतों के 5,714 कार्य पूर्ण और 5,093 प्रगति पर।
- सोकपिट और स्टैबलाइजेशन पांड के 3,825 कार्य पूर्ण, 512 कार्य निर्माणाधीन।
- वाटरशेड विकास के 66,135 कार्य पूर्ण, 52,097 कार्य प्रगति पर।
- घनघोर वृक्षारोपण के 20,922 कार्य पूर्ण, जबकि 23,089 कार्य प्रगति पर हैं।
प्रशिक्षण व जनजागरूकता से बनी जल चेतना
>राज्य के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने 228 जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किए हैं, जिनमें किसानों, छात्रों, ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को जल प्रबंधन, वर्षा जल संचयन और स्थायी कृषि पद्धतियों पर प्रशिक्षित किया गया।
>एग्रीकल्चर व हॉर्टीकल्चर विभागों ने इस अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाया, जबकि JSA:CTR MIS पोर्टल पर सभी गतिविधियों की नियमित अपडेटिंग से पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।
जल संरक्षण का भविष्य: उत्तर प्रदेश बना देश के लिए प्रेरणा
>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल संकट को लेकर गंभीर रुख अपनाते हुए इसे “जनभागीदारी से जनचेतना” का रूप दिया है। राज्य का यह समन्वित प्रयास आने वाले वर्षों में न केवल जल संकट को टालने में मदद करेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को जल सशक्त भारत की दिशा में अग्रणी राज्य बना देगा।
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