सौ शहाबुद्दीन भी आ जाएं… -- सिवान रैली में अमित शाह का प्रहार– ओसामा को जीतने नहीं देंगे

Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सिवान में हुई अमित शाह की रैली में गृह मंत्री ने लालू परिवार पर तीखे वार किए। उन्होंने कहा, 'सौ शहाबुद्दीन भी आ जाएं तो किसी का बाल भी बांका नहीं होगा।' अमित शाह ने घुसपैठियों और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी सख्त रुख अपनाया। NDA के नेतृत्व में बिहार को सुरक्षित और विकासोन्मुख बनाना हमारी प्राथमिकता है
News Desk 24 Oct 2025, 04:45 AM 1 min read
सौ शहाबुद्दीन भी आ जाएं…  -- सिवान रैली में अमित शाह का प्रहार– ओसामा को जीतने नहीं देंगे


>बिहार विधानसभा चुनावी तालमेल के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिवान में आयोजित जनसभा में विपक्ष और विशेषकर लालू परिवार पर तीखे हमले किए। रैली में अमित शाह ने 1990 के दशक कीLaw-and-order चुनौतियों और उस दौर के कथित अत्याचारों को याद दिलाते हुए कहा कि अब बिहार में “मोदी–नीतीश” का राज है और कोई भी चरित्र उसके ढांचे को हिला नहीं सकता।


>अमित शाह ने अपने भाषण में पूर्वांचल के सन्दर्भ में शहाबुद्दीन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर ने सिवान को त्रस्त किया था, और वर्तमान में उसी विचारधारा को प्रतिनिधित्व करने वालों को सत्ता में आने नहीं दिया जाएगा। उनके शब्दों में अगर किसी का आशय किसी व्यक्तिगत रक्षक-मंडल से था तो उन्होंने जनता से स्पष्ट आश्वासन लिया कि अब कानून-व्यवस्था को मज़बूत रखा जाएगा।


>रैली में केंद्रीय गृहमंत्री ने यह भी जोर दिया कि नीतीश जनता की आवाज़ बनकर बिहार में जंगलराज को खत्म करने का काम कर चुके हैं और एनडीए के नेतृत्व में यह काम जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि शहाबुद्दीन के बेटे को जहाँ-तहाँ टिकट दिए जाने की बात भी उठाई जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों को भरोसा दिलाया गया कि किसी भी तरह की विरासत-हिंसा या भ्रष्टि‍चार की राजनीति को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।


>एक महत्वपूर्ण संदेश में अमित शाह ने घुसपैठियों के मुद्दे को भी उठाया और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग घुसपैठियों को बचाने की पैरवी करते हैं, वे राष्ट्रीय सुरक्षा और मतदाता-सूची की पवित्रता के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि NDA सरकार वापस आने पर चुनावी और नागरिक प्रक्रियाओं की पड़ताल कर गैरकानूनी रूप से बसे लोगों के ख़िलाफ़़ तय-शुदा कार्रवाई होगी।


>विपक्ष की ओर से इन आरोपों पर घोर प्रतिद्वंद्विता की नीति अपनाने की आशंका भी जताई जा सकती है। चुनी हुई सरकारों और राजनैतिक नेतृत्व के बीच कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण व प्राथमिकताओं में मतभेद आम हैं, पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चुनावी मंच पर की गई ऐसी घोषणाएँ और सबूत-आधारित बहस ही अंतिम निर्णायक होती है।

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