बस्ती में कांवड़ यात्रा बना विवाद का कारण


>सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की भक्ति में लीन कांवड़ यात्रियों का उत्साह हर वर्ष देखने लायक होता है, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश के बस्ती ज़िले से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने श्रद्धा और प्रदर्शन के बीच की सीमाओं को बहस के कटघरे में ला खड़ा किया है।


>बस्ती के दुबौलिया थाना क्षेत्र के रमवापुर ऊंजी गांव की एक कांवड़ यात्रा टोली का वीडियो सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त वायरल हो रहा है, जिसमें दो किन्नर डांसर एक सजे-धजे ट्रैक्टर पर तेज़ डीजे म्यूज़िक पर डांस कर रही हैं, और पीछे कांवड़िये झूमते-गाते नज़र आ रहे हैं। यह टोली अयोध्या की सरयू नदी से पवित्र जल लेकर लौट रही थी।


>इस वायरल वीडियो ने धार्मिक संगठनों, श्रद्धालुओं और आम जनमानस के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कई यूज़र्स ने इसे "आस्था का मजाक" बताते हुए कड़ी आलोचना की है। कुछ ने लिखा कि "यह कांवड़ नहीं, कार्निवाल लग रहा है!" तो कुछ ने इसे "नवीन पीढ़ी की श्रद्धा की शैली" कहकर समर्थन भी दिया।


>परंपरागत रूप से कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति गहन भक्ति का पर्व रही है, जिसमें श्रद्धालु पवित्र नदियों से जल भरकर शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा सादगी, संयम और साधना की मिसाल रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें डीजे, नृत्य, ट्रक-डेकोरेशन, और रंगीन शो जैसे नए ट्रेंड शामिल हो चुके हैं।


>बस्ती का यह वीडियो इसी बदलते स्वरूप की बानगी बन गया है — जहाँ कुछ लोग इसे "आधुनिक अभिव्यक्ति" मान रहे हैं, वहीं कई धार्मिक संगठनों ने इसे "परंपरा की मर्यादा के विरुद्ध" बताया है।


>इस मामले में कई धार्मिक संगठनों ने वीडियो पर नाराजगी जताते हुए इसे "कांवड़ यात्रा की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला" करार दिया है। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग करते हुए लिखा, “कांवड़ यात्रा की पवित्रता बचाने के लिए ऐसे प्रदर्शनों पर रोक ज़रूरी है।”


>हालांकि, इस पूरे मामले पर बस्ती जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह चुप्पी प्रशासन की भूमिका और ज़िम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर रही है।


 

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