Lucknow News: केजीएमयू में सामने आए धर्मांतरण मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए पहलु सामने आ रहे हैं और अब इस मामले में दो डॉक्टरों के सामने आए है। STF की जांच के मुताबिक, दोनों डॉक्टर इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाईक से जुड़े हुए है। आरोप है कि वे KGMU और PGI में उसकी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे और दूसरे लोगों को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश में लगे थे।
इतना ही नही, जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके लिए अलग-अलग ग्रुप बनाए गए थे, जिनमें जाकिर नाईक के भाषण और दुसरे धार्मिक संदेश साझा किये जाते थी। आरोप है कि इन ग्रुपों के जरिए डॉक्टरों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई जा रही थी।
नए छात्रों को बनाया जा रहा था संपर्क का जरिया
STF की जांच में सबसे अहम बात यह सामने आई है कि KGMU में नए दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को इन सोशल मीडिया ग्रुपों से जोड़ने की कोशिश की जाती थी। खासकर मुस्लिम विद्यार्थियों को निशाना बनाकर उनसे संपर्क बढ़ाने के आरोप हैं। और इसकी शुरुआत सोशल मीडिया ग्रुप से होती थी। इसके बाद विद्यार्थियों को संबंधित लोगों के सीधे संपर्क में लाया जाता था। जांच में ऐसे आरोप भी सामने आए हैं कि कुछ लोगों को दूसरे विद्यार्थियों और परिचितों को इन ग्रुपों से जोड़ने की जिम्मेदारी दी जाती थी। इस तरह धीरे-धीरे नेटवर्क का दायरा बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी।
जांच में शामिल दोनों डॉक्टरों में से एक के कश्मीर की रहने वाली होने की बात सामने आई है। STF अब उनके संपर्कों और गतिविधियों की जांच कर रही है। जांच के दौरान केजीएमयू में होने वाली कुछ भाषणो का भी जिक्र आया है।
बताया जा रहा है कि इन भाषण में कश्मीर के मौलाना समेत कुछ अन्य लोग भी शामिल होते थे। अब STF यह पता लगाने में जुटी है कि ये लोग कौन थे, किसके बुलाने पर आते थे और इन कार्यक्रमों का उद्देश्य क्या था। जांच एजेंसी इन सभी कड़ियों को आपस में जोड़कर देख रही है, ताकि यह साफ हो सके कि इन नेटवर्क के पीछे किन लोगों की भूमिका थी और उनका आपसी संपर्क किस तरह बना हुआ था।
केजीएमयू से बाहर भी पहुंची जांच
मामले की जांच अब केवल केजीएमयू और पीजीआई तक सीमित नहीं रह गई है। STF ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए इंटीग्रल विश्वविद्यालय और आगरा के एक मेडिकल कॉलेज तक जांच पहुंचाई है। इन संस्थानों से जुड़े कुछ डॉक्टरों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन संस्थानों के कुछ लोग भी उसी नेटवर्क से जुड़े हुए थे या उनके बीच किसी तरह का संपर्क था।
इस पूरे मामले में अब STF के सामने कई अहम सवाल हैं। सोशल मीडिया ग्रुप किसने बनाए, इनमें कौन-कौन लोग जुड़े थे, विद्यार्थियों को जोड़ने की जिम्मेदारी किसे दी गई थी और अलग-अलग मेडिकल संस्थानों के बीच संपर्क कैसे बने?
इसके साथ ही कश्मीर से आने वाले मौलानाओं की भूमिका और दोनों डॉक्टरों के कथित संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल जांच का लक्ष्य पूरे नेटवर्क की कड़ियों को समझना और मामले में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट करना है। जांच पूरी होने और आधिकारिक तौर पर तथ्यों की पुष्टि होने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।
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