करीब साढ़े तीन साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में बृज भूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी कर दिया।
यह मामला जनवरी 2023 में सार्वजनिक रूप से सामने आया था और इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बना। अदालत ने 2 जुलाई 2026 को दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में जनवरी 2023 से लेकर फैसले तक कुल 1,133 दिनों की न्यायिक प्रक्रिया चली। इस दौरान अदालत में 127 बार सुनवाई हुई। लंबी सुनवाई के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।
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दिल्ली पुलिस ने 15 जून को दाखिल अपने आरोपपत्र में बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ महिलाओं की मर्यादा भंग करने, कथित यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी से संबंधित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए थे। मामले में बृज भूषण शरण सिंह के साथ भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी सह-आरोपी बनाया गया था।
इस मामले की सुनवाई के दौरान मई 2024 में अदालत ने बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ आपराधिक धमकी से जुड़े आरोप तय करने का आदेश दिया था। हालांकि, छह शिकायतकर्ताओं में से एक महिला पहलवान की शिकायत के संबंध में अदालत ने उस समय उन्हें आरोपमुक्त कर दिया था। इसी आदेश में अदालत ने सह-आरोपी विनोद तोमर के खिलाफ भी आरोप तय करने की अनुमति दी थी।
मामले की सुनवाई के दौरान बृज भूषण शरण सिंह और विनोद तोमर दोनों जमानत पर थे। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने 2 जुलाई 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया।
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