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चौधरी चरण सिंह जयंती पर हापुड़ में बड़ा राजनीतिक आयोजन, पीएम मोदी के आने की चर्चा

जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के शामिल होने की चर्चा है, हालांकि प्रदेश भाजपा इकाई की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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Bureau News Desk
10 Sep 2026
11:56 AM
1 min read
चौधरी चरण सिंह जयंती पर हापुड़ में बड़ा राजनीतिक आयोजन, पीएम मोदी के आने की चर्चा
हाइलाइट्स
चौधरी चरण सिंह की जयंती पर 23 दिसंबर को हापुड़ के नूरपुर में जनसभा की तैयारी है।
नूरपुर को चौधरी चरण सिंह का पैतृक गांव बताया गया है।
जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के शामिल होने की चर्चा है।
प्रदेश भाजपा इकाई की ओर से दोनों नेताओं की मौजूदगी की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

लखनऊ। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) 23 दिसंबर को हापुड़ के नूरपुर में एक बड़ी जनसभा आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। नूरपुर को चौधरी चरण सिंह का पैतृक गांव बताया जाता है। प्रस्तावित जनसभा को लेकर भाजपा और रालोद के शीर्ष नेताओं के बीच दिल्ली में चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।

इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के शामिल होने की चर्चा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रदेश भाजपा इकाई की ओर से अभी इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में दोनों नेताओं की मौजूदगी को फिलहाल प्रस्तावित कार्यक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है।

रालोद चौधरी चरण सिंह की जयंती पर उनके पैतृक गांव नूरपुर में जनसभा की तैयारी कर रहा है। पार्टी की ओर से इस आयोजन को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। भाजपा और रालोद के शीर्ष नेताओं के बीच दिल्ली में हापुड़ में जनसभा आयोजित करने को लेकर मंथन हुआ है।

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चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत का पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में विशेष स्थान रहा है। किसान राजनीति से जुड़े मुद्दों और उनकी राजनीतिक विचारधारा का इस क्षेत्र में लंबे समय से प्रभाव रहा है। इसी पृष्ठभूमि में उनकी जयंती पर नूरपुर में होने वाली जनसभा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आयोजन के तौर पर देखी जा रही है।

भाजपा और रालोद के मौजूदा संबंधों को समझने के लिए पिछले एक दशक के राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डालना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर 2022 के विधानसभा चुनाव तक दोनों दलों के बीच राजनीतिक दूरी रही।

इस अवधि में रालोद ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ मिलकर भी चुनाव लड़ा। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रालोद और भाजपा के बीच राजनीतिक नजदीकी बढ़ने लगी। इसी दौरान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा की। इसके बाद भाजपा और रालोद के बीच गठबंधन हुआ। 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा और इसके बाद भी यह राजनीतिक साझेदारी जारी रही।

रालोद प्रमुख जयन्त चौधरी को केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया। इसके बाद भाजपा और रालोद के बीच राजनीतिक समन्वय के कई मौके सामने आए हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जयन्त चौधरी कई कार्यक्रमों में एक साथ मंच साझा कर चुके हैं। भाजपा की ओर से जयन्त चौधरी को केंद्र में जिम्मेदारी दिए जाने को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के संदर्भ में भी देखा गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में उनकी जिम्मेदारी बढ़ाए जाने की भी चर्चा है, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय उपलब्ध जानकारी में नहीं बताया गया है।

चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत विशेष रूप से किसानों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी रही है। इस क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पहचान लंबे समय से प्रभावशाली रही है। रालोद अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में भी अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए पार्टी की ओर से आधा दर्जन से अधिक जनसभाएं आयोजित किए जाने की तैयारी की जानकारी दी गई है।

हापुड़ के नूरपुर में प्रस्तावित कार्यक्रम इसी व्यापक राजनीतिक गतिविधि का हिस्सा है। भाजपा और रालोद के बीच गठबंधन के मौजूदा दौर में यह आयोजन दोनों दलों के नेताओं के साझा मंच के रूप में भी सामने आ सकता है। हालांकि, कार्यक्रम में किन नेताओं की अंतिम रूप से मौजूदगी होगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

भाजपा और रालोद के बीच राजनीतिक संबंध समय-समय पर बदले हैं। 2014 से 2022 के बीच दोनों दल अलग-अलग राजनीतिक खेमों में रहे। इस दौरान रालोद ने अलग-अलग चुनावों में विपक्षी दलों के साथ गठजोड़ किया।

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आया और जयन्त चौधरी के नेतृत्व वाला रालोद भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हुआ। चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने के बाद दोनों दलों के बीच संबंधों को नया राजनीतिक संदर्भ भी मिला। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भी दोनों दलों का गठबंधन बना रहा। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जयन्त चौधरी के एक साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने से दोनों दलों के बीच समन्वय की स्थिति भी सामने आई है।

हापुड़ का नूरपुर चौधरी चरण सिंह का पैतृक गांव है। ऐसे में उनकी जयंती पर यहां राजनीतिक आयोजन का अपना ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ है। चौधरी चरण सिंह को भारतीय राजनीति में किसान हितों से जुड़ी राजनीति के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने वाले चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत का प्रभाव विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में देखा जाता रहा है।

उनके पुत्र चौधरी अजित सिंह ने भी लंबे समय तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में रालोद का नेतृत्व किया। समय के साथ पार्टी के राजनीतिक गठबंधन बदलते रहे, लेकिन चौधरी चरण सिंह की विरासत रालोद की राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रही।

प्रस्तावित जनसभा को लेकर सबसे महत्वपूर्ण चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की संभावित मौजूदगी को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भाजपा और रालोद के शीर्ष नेताओं ने दिल्ली में हापुड़ की जनसभा को लेकर विचार-विमर्श किया है। प्रधानमंत्री की मौजूदगी से कार्यक्रम का दायरा बढ़ने की संभावना पर राजनीतिक स्तर पर चर्चा है, लेकिन अभी तक प्रदेश भाजपा इकाई ने इस कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

इसलिए प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर अंतिम स्थिति आधिकारिक कार्यक्रम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। रालोद पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आगे बढ़कर पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में भी अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। पार्टी की योजना आधा दर्जन से अधिक जनसभाएं आयोजित करने की है।

हापुड़ की जनसभा को इसी क्रम में प्रमुख आयोजन के तौर पर तैयार किया जा रहा है। 23 दिसंबर को होने वाला कार्यक्रम चौधरी चरण सिंह की जयंती से जुड़ा होने के कारण पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान राजनीति और जाट समुदाय का राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भाजपा और रालोद के बीच मौजूदा गठबंधन इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

रालोद के साथ गठबंधन के जरिए भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने राजनीतिक सहयोग को मजबूत बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी ओर रालोद भी राज्य के अन्य हिस्सों में संगठन और जनाधार बढ़ाने के लिए गतिविधियां कर रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आगामी चुनावों को लेकर कोई नया सीट समझौता या चुनावी रणनीति घोषित नहीं की गई है। इसलिए हापुड़ की प्रस्तावित जनसभा को लेकर फिलहाल उपलब्ध तथ्यों तक ही सीमित रहना महत्वपूर्ण है।

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और रालोद के बीच नजदीकी बढ़ी और दोनों दल गठबंधन में आए। चुनाव के बाद भी यह गठबंधन जारी रहा। इस दौरान दोनों दलों के प्रमुख नेताओं की सार्वजनिक गतिविधियों में साथ मौजूदगी देखी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जयन्त चौधरी के एक साथ मंच साझा करने के उदाहरण भी सामने आए हैं।

अब चौधरी चरण सिंह जयंती पर उनके पैतृक गांव में प्रस्तावित जनसभा इसी राजनीतिक साझेदारी के बीच होने वाला प्रमुख आयोजन है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नितिन नवीन की संभावित मौजूदगी को लेकर चर्चा है, लेकिन अंतिम कार्यक्रम और नेताओं की भागीदारी की आधिकारिक जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

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