>उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मैनपुरी के डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला को आय से अधिक संपत्ति के मामले में निलंबित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि डीएसपी शुक्ला, कानपुर के चर्चित वकील अखिलेश दुबे के बेहद करीबी थे, और दोनों पर मिलकर अवैध कमाई व संपत्ति जुटाने का आरोप है। विजिलेंस और एसआईटी जांच में खुलासा हुआ कि उन्होंने लगभग 100 करोड़ रुपये की अकूत संपत्ति खड़ी कर ली थी।
>जांच में सामने आया है कि ऋषिकांत शुक्ला ने कानपुर में तैनाती के दौरान अपनी हैसियत से कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित की। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने आर्यनगर क्षेत्र में 11 दुकानें और 12 ज़मीनें खरीदीं, जिनकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 92 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा, अन्य स्थानों पर भी संपत्ति निवेश के दस्तावेज़ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
>शुक्ला की सबसे लंबी तैनाती कानपुर में सीओ पद पर रही, जहां वे वकील अखिलेश दुबे के करीबी बन गए। आरोप है कि दोनों ने मिलकर लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाकर उनसे वसूली और ज़मीन कब्जाने का काम किया। यही नहीं, पुलिसिया रुतबे का इस्तेमाल करते हुए कई प्रॉपर्टी सौदे दबाव में कराए गए।
>विजिलेंस जांच में शुक्ला की संपत्ति का मूल्यांकन करने पर मामला और गंभीर हो गया। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि उनकी आय और संपत्ति में स्पष्ट असमानता है। एसआईटी की विस्तृत जांच में यह भी सामने आया कि उनकी संपत्ति के कुछ हिस्से रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर खरीदे गए। गृह विभाग के सचिव IAS जगदीश ने तत्काल प्रभाव से शुक्ला के निलंबन के आदेश जारी किए हैं और विजिलेंस विभाग को विस्तृत जांच सौंप दी गई है।
>डीएसपी शुक्ला के निलंबन के बाद कानपुर पुलिस विभाग में हलचल मची हुई है। कई अधिकारी अब अपनी संपत्तियों और तैनाती काल की जांच को लेकर सतर्क हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले से जुड़ी और भी फाइलें खुलने की संभावना है।
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