एक ठग और चार देश - गाजियाबाद में चल रहे थे फर्जी दूतावास


>उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए गाजियाबाद में चल रहे एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय दूतावास रैकेट का पर्दाफाश किया है। देश में फर्जी विश्वविद्यालय और बैंकों के बाद अब नकली दूतावासों का जाल भी फैलने लगा है, और इसका मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि हर्षवर्धन जैन नाम का व्यक्ति है, जो खुद को वेस्ट आर्कटिक, सेबोर्गा, पोल्विया और लोडोनिया जैसे काल्पनिक देशों का राजदूत बताता था।


>उत्तर प्रदेश एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने कविनगर क्षेत्र में किराए के मकान पर चल रहे इस अवैध दूतावास पर छापा मारा और हर्षवर्धन को रंगे हाथों पकड़ लिया। छापेमारी में पुलिस को लग्जरी डिप्लोमेटिक गाड़ियां, नकली पासपोर्ट, विदेशी मुद्रा और 44 लाख से अधिक नकद बरामद हुआ।


>कैसे चलाता था फर्जी दूतावास का खेल?


>हर्षवर्धन ने फर्जी दस्तावेजों, प्रेस कार्ड, विदेशी मोहरों और डिप्लोमैटिक प्लेट्स के सहारे ऐसा नेटवर्क खड़ा किया था जो दिखने में पूरी तरह आधिकारिक लगता था। वह खुद को काल्पनिक देशों का काउंसल जनरल या राजदूत बताकर लोगों को विदेशों में रोजगार, निवेश और व्यापार के नाम पर ठगता था।


>इस जाल में वह बड़े-बड़े बिजनेस मैन और आम नागरिकों को उलझाकर हवाला और दलाली के माध्यम से पैसे बनाता था। उसके पास से 20 डिप्लोमैटिक गाड़ियों की नंबर प्लेटें, 12 माइक्रोनेशन देशों के पासपोर्ट, और विदेश मंत्रालय की नकली मोहरें बरामद हुई हैं।


>क्या-क्या बरामद हुआ?


    >
  • ₹44,70,000 नकद

  • 4 डिप्लोमैटिक नम्बर प्लेट लगी लग्जरी गाड़ियां

  • 18 अतिरिक्त डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट

  • 12 नकली विदेशी डिप्लोमैटिक पासपोर्ट

  • विदेश मंत्रालय की मोहर वाले कूटरचित दस्तावेज

  • 34 विभिन्न कंपनियों और देशों की मोहरें

  • 2 नकली प्रेस कार्ड

  • 2 पैन कार्ड

  • विदेशी मुद्रा

  • एक लैपटॉप, मोबाइल, पेन ड्राइव और 12 घड़ियां

  • डायरी में बैंक खातों और फोन नंबरों का ब्योरा


>एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया कि हर्षवर्धन के संपर्क चंद्रास्वामी और अंतरराष्ट्रीय हथियार डीलर अदनान खगोशी जैसे लोगों से भी रहे हैं। वर्ष 2011 में भी उसके पास से अवैध सैटेलाइट फोन बरामद हुआ था, जिसकी शिकायत कविनगर थाने में दर्ज हुई थी।


>छापा मारने गई एसटीएफ टीम को मकान में हर्षवर्धन का ससुर आनंद जैन, एक परिचित ईश्वर सिंह और घरेलू सहायक हेमंत कुमार राजवंशी भी मिले। ईश्वर और हेमंत को सरकारी गवाह बनाया गया है।


 

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