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पंचर की दुकान, टूटी आर्थिक हालत और 100 करोड़ की कंपनी... गोरखपुर का मामला देखकर अफसर भी रह गए हैरान

बहन की शादी के लिए लिया था उधार, अब 28 करोड़ रुपये की CGST देनदारी वाले समन ने बदल दी जिंदगी।
Bureau
Bureau News Desk
22 Jun 2026
10:54 AM
1 min read
पंचर की दुकान, टूटी आर्थिक हालत और 100 करोड़ की कंपनी... गोरखपुर का मामला देखकर अफसर भी रह गए हैरान
हाइलाइट्स
बहन की शादी के लिए लिया था उधार, अब 28 करोड़ रुपये की CGST देनदारी वाले समन ने बदल दी जिंदगी।

 

एक तरफ गांव में पंचर बनाने की छोटी-सी दुकान, दूसरी तरफ कागजों में 100 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली कंपनी। गोरखपुर से सामने आया यह मामला सिर्फ एक कथित टैक्स चोरी की जांच नहीं, बल्कि उन सवालों को भी सामने ला रहा है कि आखिर किसी साधारण व्यक्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर इतनी बड़ी कंपनी कैसे खड़ी कर दी गई। दिलचस्प बात यह रही कि जब जांच के लिए पहुंचे अधिकारी उस पते तक पहुंचे, तो सामने जो तस्वीर थी, उसने उन्हें भी चौंका दिया।

 

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एम्स थाना क्षेत्र के रामपुर बुजुर्ग गांव निवासी राज प्रजापति रोजमर्रा की जिंदगी चलाने के लिए पंचर की दुकान चलाते हैं। लेकिन केंद्रीय जीएसटी विभाग से मिले एक समन ने उनकी जिंदगी में अचानक हलचल पैदा कर दी। समन में बताया गया कि उनके नाम पर 'मेसर्स गड़जेट्रीक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी दर्ज है, जिसका टर्नओवर करीब 100 करोड़ रुपये दिखाया गया है। साथ ही लगभग 28 करोड़ रुपये की सीजीएसटी देनदारी का भी जिक्र किया गया।

 

फरवरी 2026 में वाराणसी सीजीएसटी विभाग को जांच के दौरान इस कंपनी से जुड़े दस्तावेज मिले। जांच आगे बढ़ी तो मार्च में विभाग की टीम गोरखपुर के रामपुर बुजुर्ग गांव पहुंची। अधिकारियों के सामने जो दृश्य था, वह दस्तावेजों में दर्ज करोड़ों के कारोबार से बिल्कुल अलग था। कागजों में 100 करोड़ रुपये की कंपनी का मालिक बताया जा रहा व्यक्ति गांव में एक छोटी-सी पंचर की दुकान चलाता मिला। बताया गया कि उसकी आर्थिक स्थिति भी बेहद सामान्य है।

 

राज प्रजापति के अनुसार, बहन की शादी के लिए उन्होंने गांव के ही एक व्यक्ति से आर्थिक मदद ली थी। इसी दौरान उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज लिए गए। पीड़ित का आरोप है कि उन्हें बताया गया था कि बैंक से लोन दिलाने की प्रक्रिया के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत है। उन्हें यह अंदाजा तक नहीं था कि इन्हीं कागजातों का इस्तेमाल कथित तौर पर किसी और उद्देश्य के लिए किया जाएगा।

 

राज प्रजापति ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि उनसे कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए और दो बार वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया। बाद में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम से 'मेसर्स गड़जेट्रीक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी खड़ी कर दी गई। आरोप है कि यस बैंक में कंपनी के नाम से खाता भी खुलवाया गया।

 

राज प्रजापति के नाम वाराणसी सीजीएसटी कार्यालय से 27 मई को समन जारी किया गया। उन्हें 29 मई को कमिश्नर कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया था। समन मिलने के बाद उन्होंने अपनी पूरी जानकारी अधिकारियों के सामने रखी। इसके बाद 30 मई को एम्स थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई।

 

सीओ कैंट आभा सिंह के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गांव के ही अमित गुप्ता ने लोन दिलाने के नाम पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और हस्ताक्षर लिए थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनी बनाई गई। पुलिस के मुताबिक, पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

 

यह पूरा प्रकरण एक बार फिर इस सवाल को सामने ला रहा है कि व्यक्तिगत दस्तावेजों का इस्तेमाल किस सावधानी से किया जाना चाहिए। आधार कार्ड, पैन कार्ड और हस्ताक्षर जैसे दस्तावेज किसी भी वित्तीय प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।


 

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