>उत्तर प्रदेश सरकार ने कान्हा गौशालाओं को सिर्फ एक शासकीय व्यवस्था नहीं, बल्कि जनभागीदारी आधारित संवेदनशील मिशन बनाने का संकल्प लिया है। अब समाज, संस्थाएं और गौप्रेमी नागरिक गौशालाओं को गोद लेकर उनके संचालन में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सकेंगे।
>नगर विकास विभाग की हालिया राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में सभी नगर आयुक्तों को निर्देशित किया गया कि वे अपनी-अपनी कान्हा गौशालाओं का भौतिक निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट नगरीय निकाय निदेशालय को भेजें।
निरीक्षण में इन बिंदुओं की होगी समीक्षा
- संरक्षित गौवंश की संख्या
- चारा, पानी और टीकाकरण की व्यवस्था
- ईयर टैगिंग और स्वास्थ्य सुविधा
- सीसीटीवी और अपशिष्ट प्रबंधन
- शेड की दशा और सफाई व्यवस्था
>इस रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि गौशालाएं कितनी कारगर ढंग से संचालित हो रही हैं और कहां सुधार की आवश्यकता है।
>बैठक में निर्णय लिया गया कि गौशालाओं को गोद लेने की योजना को गति दी जाएगी। गैर-सरकारी संगठन (NGO), समाजसेवी संस्थाएं और स्थानीय गौभक्तों को आमंत्रित किया जाएगा कि वे इस सेवा कार्य में भाग लें।
>नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने कहा कि, “गौसेवा उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। अब इसे प्रशासनिक निगरानी और सामाजिक संवेदना के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे पारदर्शिता और उत्तरदायित्व भी सुनिश्चित हो सके।”
>नगर निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस योजना का अधिकतम प्रचार-प्रसार करें।
- समाचार पत्र, सूचना पट्ट, वेबसाइट,
- सोशल मीडिया, और
- जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जागरूकता फैलाई जाए।
>इस योजना का लक्ष्य है कि गौशालाएं केवल गौवंश के लिए आश्रय न होकर, जनआस्था, संवेदनशील प्रशासन और सामाजिक सहभागिता का संगम बनें। यह उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से संवेदनशील, सशक्त और सतत गौसेवा की दिशा में उठाया गया एक साहसिक कदम है।
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