सवा दो करोड़ के कैंसर दवा फर्जीवाड़े में जांच पूरी, नोडल अधिकारी पर कार्रवाई की सिफारिश

केजीएमयू की पांच सदस्यीय समिति को जांच में रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण के बीच कई विसंगतियां मिलीं, रिपोर्ट में नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी भी तय की गई।

 

 

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के यूरोलॉजी विभाग में असाध्य रोग योजना के तहत कैंसर मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली महंगी दवाओं में कथित फर्जीवाड़े की जांच पूरी हो गई है। पांच सदस्यीय समिति की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में विभागीय नोडल अधिकारी डॉ. विवेक सिंह को भी लापरवाही और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार माना गया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

 

जांच समिति ने दवाओं की खरीद, वितरण, मरीजों के अभिलेख, स्टॉक रजिस्टर और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की विस्तार से जांच की। इस दौरान कई मामलों में रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण के बीच अंतर पाया गया। कुछ मरीजों के नाम पर दवाओं का निर्गमन दर्शाया गया, जबकि संबंधित दस्तावेजों में आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं होने की बात सामने आई।

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रिपोर्ट के मुताबिक, योजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी विभागीय नोडल अधिकारी के पास थी। इसके बावजूद समय-समय पर स्टॉक सत्यापन नहीं किया गया और दवाओं के उपयोग संबंधी अभिलेखों की नियमित समीक्षा भी नहीं की गई। समिति ने इसे प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक माना है।

 

इस मामले में पिछले महीने दोषी पाए गए संविदाकर्मियों को सेवा से हटाया जा चुका है। वहीं वरिष्ठ फार्मासिस्ट अब्बास को निलंबित किया गया था और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की भी संस्तुति की गई थी।

 

यूरोलॉजी विभाग में असाध्य रोग योजना के तहत कैंसर मरीजों की दवाओं की खरीद में करीब सवा दो करोड़ रुपये की अनियमितता सामने आई थी। पिछले वर्ष दिसंबर तक जहां दवाओं की खपत लगभग 10 लाख रुपये थी, वहीं इस वर्ष जनवरी से मई के बीच यह बढ़कर 40 से 45 लाख रुपये तक पहुंच गई। इसके बाद कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की थी।

 

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इस घटना के बाद केजीएमयू प्रशासन ने उन सात विभागों के ऑडिट का निर्णय लिया है, जहां कैंसर रोगियों का इलाज किया जाता है। उद्देश्य भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकना और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना है। केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने कहा कि मरीजों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट अगले दो से तीन दिनों में कुलपति कार्यालय को सौंप दी जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।


 

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