बाबा की सीख से बदल दी किस्मत: खेती से कमाए करोड़ों, देशभर में हुआ नाम


>"खेती तब तक काम की नहीं जब तक वो किसान का पेट ही नहीं, जेब भी न भर दे।" यह अनमोल सीख थी लखीमपुर खीरी के प्रगतिशील किसान श्यामलाल वर्मा की, जिन्होंने 1950 के दशक में ही खेती में नवाचार और वैकल्पिक फसलों की अहमियत को समझ लिया था। उन्होंने न सिर्फ खुद इस सोच को अपनाया, बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी यही विरासत सौंपी। आज उसी सोच को आगे बढ़ा रहे हैं उनकी तीसरी पीढ़ी के युवा, अमित वर्मा, जो बागवानी को खेती का भविष्य मानते हैं और योगी सरकार की योजनाओं से प्रभावित होकर कृषि को तकनीक से जोड़ने का काम कर रहे हैं।


>देश के पहले राष्ट्रपति से मिला सम्मान: बाबा श्यामलाल वर्मा की कहानी


>सन् 1956 में जब भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश के चुनिंदा प्रगतिशील किसानों को भारत दर्शन पर भेजा, तब उनमें श्यामलाल वर्मा भी शामिल थे। वैज्ञानिकों और अन्य किसानों से संवाद के बाद उनका नजरिया बदल गया। परिणामस्वरूप, 1958 में प्रति हेक्टेयर गेहूं उत्पादन में उन्हें उत्तर प्रदेश में दूसरा स्थान मिला।


>वकालत छोड़ अपनाई खेती: पिताजी सुरेश चंद्र वर्मा की प्रेरणादायक राह


>एलएलबी करने के बावजूद सुरेश चंद्र वर्मा ने वकालत नहीं की, बल्कि बागवानी को अपना जीवन बना लिया। वर्ष 2005 में उन्हें लखीमपुर खीरी के सर्वोत्तम बागवान का खिताब मिला। उनके कृषि नवाचार पर दिल्ली दूरदर्शन ने ‘किरण’ नाम की डॉक्युमेंट्री भी बनाई थी।


>तीसरी पीढ़ी के अमित वर्मा: बागवानी और तकनीक का संगम


>पोस्ट ग्रेजुएट अमित वर्मा खेती और शिक्षा दोनों में योगदान दे रहे हैं। एक ओर वह अपने 18 एकड़ के बाग में आम, कटहल, लीची, आंवला, बांस और सागौन जैसी बहुपयोगी फसलें उगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वह Decode Exam नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए UPPSC और अन्य परीक्षाओं की तैयारी करा रहे हैं।


>बाग की विशेषताएं: सौंदर्य और उत्पादन का अद्भुत संगम


>अमित वर्मा का बाग लगभग एक जीवंत जैविक संग्रहालय जैसा है।


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  • 1000+ आम के पेड़ (विभिन्न किस्में)

  • 500 आम्रपाली के पौधे (सघन बागवानी योजना के अंतर्गत)

  • 150 आंवला, 50 कटहल, 25 लीची के पौधे

  • 1.25 एकड़ में बांस, 200 सागौन के पेड़


>फलों की मिठास, कोयल की कूक और मोर की कूह-कूह से सजी इस भूमि पर पहुंचने वाला हर व्यक्ति इसे 'बाग-बाग' कह उठता है।


>योगी सरकार की योजनाओं से खेती को नई दिशा


>अमित वर्मा मानते हैं कि योगी सरकार की योजनाएं खेती को आत्मनिर्भर और टिकाऊ बना रही हैं।


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    उन्होंने ऑन-ग्रिड सोलर पंप योजना के लिए आवेदन किया है।


  • >आगामी चरण में ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाने की तैयारी है, जिस पर सरकार अनुदान देती है।


 

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