लखनऊ के उस कोचिंग सेंटर में आखिर चूक कहां हुई? बच्चों की मौत के बाद उठे कई सवाल, संजय सिंह ने मांगी जवाबदेही

कई परिवारों के सपने एक झटके में टूटे, राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पूरे प्रदेश में फायर सेफ्टी ऑडिट की मांग उठाई।

 

सुबह तक जिस कोचिंग सेंटर में भविष्य गढ़ने की उम्मीदें थीं, कुछ ही घंटों बाद वही जगह कई परिवारों के लिए असहनीय दुख की वजह बन गई। राजधानी लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग और उसमें कई मासूम बच्चों की मौत की खबर ने न सिर्फ परिवारों बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक घटना के बाद अब केवल हादसे की भयावहता ही चर्चा में नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठने लगे हैं कि आखिर ऐसी स्थिति बनी कैसे और सुरक्षा मानकों के पालन में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।

 

लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुई इस घटना के बाद आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इसे बेहद पीड़ादायक बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। संजय सिंह ने कहा कि जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ पढ़ने भेजा था, उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने दिवंगत बच्चों की आत्मा की शांति और परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की।

 

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हादसे के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आने लगे हैं। क्या भवन में फायर सेफ्टी मानकों का पूरी तरह पालन किया गया था?, क्या संबंधित संस्थान को जारी किया गया 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' सभी मानकों के अनुरूप था?, और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?, इन्हीं सवालों को उठाते हुए संजय सिंह ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

 

राज्यसभा सांसद ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस तरह की लापरवाही को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संचालकों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

 

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इस घटना के बाद संजय सिंह ने केवल लखनऊ तक सीमित कार्रवाई की बात नहीं कही, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में संचालित कोचिंग संस्थानों, हॉस्टलों और शैक्षणिक केंद्रों के लिए व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट की मांग की। उनके अनुसार, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों की समीक्षा और निगरानी आवश्यक है।

 

इस हादसे के बाद संजय सिंह ने सरकार से चार प्रमुख मांगें की हैं। घटना के कारणों का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय जांच शुरू की जाए। जहां भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आए, वहां जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रभावित परिवारों को उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए और घायलों के इलाज की पूरी व्यवस्था सरकारी खर्च पर की जाए। सभी कोचिंग संस्थानों, हॉस्टलों और शैक्षणिक केंद्रों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।

 

पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में लखनऊ की यह घटना एक बार फिर शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बहस का विषय बन गई है।


 

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