पुराने लखनऊ के यासीनगंज क्षेत्र में बिजली विभाग की टीम ने रणनीति बदलते हुए तड़के तीन बजे से कार्रवाई शुरू की और बड़े पैमाने पर बिजली चोरी का मामला पकड़ा। छापेमारी के दौरान दो गोदामों में चोरी की बिजली से 35 ई-रिक्शा चार्ज होते पाए गए। इसके अलावा 12 अन्य परिसरों में कटिया और मीटर बाइपास के जरिए बिजली का उपयोग किया जा रहा था।
मुख्य अभियंता रवि कुमार अग्रवाल के निर्देश पर मध्य जोन की टीम ने बुधवार सुबह अभियान चलाया। यासीनगंज क्षेत्र में प्रवेश करते ही टीम ने दो गोदामों की जांच की, जहां अवैध रूप से बिजली का उपयोग कर 35 ई-रिक्शा चार्ज किए जा रहे थे। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, एक ई-रिक्शा को चार्ज करने में प्रतिदिन लगभग नौ से दस यूनिट बिजली की खपत होती है। ऐसे में इन गोदामों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बिजली का उपयोग किया जा रहा था।
कार्रवाई के दौरान दोनों परिसरों के बिजली कनेक्शन काट दिए गए और मीटर हटा लिए गए। अभियंताओं ने संबंधित लोगों के खिलाफ बिजली चोरी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों परिसरों में दस किलोवाट से अधिक की बिजली चोरी सामने आने के कारण आठ से दस लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
छापेमारी के दौरान टीम ने आगे की जांच में 12 अन्य परिसरों में भी बिजली चोरी पकड़ी। यहां कटिया डालकर और मीटर बाइपास कर बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा था। कई स्थानों पर एयर कंडीशनर भी इसी तरह चलाए जा रहे थे।
मुख्य अभियंता रवि कुमार अग्रवाल के अनुसार, पहले विभाग की टीम सुबह चार से पांच बजे के बीच छापा मारती थी। इससे बिजली चोरी करने वाले लोग पहले ही सतर्क हो जाते थे। इस बार विभाग ने अपनी रणनीति बदलते हुए सुबह तीन बजे से चार बजे के बीच कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान कुछ लोगों ने विजिलेंस टीम को बताया कि वे सुबह 4:30 बजे का अलार्म लगाकर सोते थे, ताकि समय रहते कटिया और मीटर बाइपास को सामान्य किया जा सके। हालांकि इस बार टीम उनके जागने से पहले ही मौके पर पहुंच गई।
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