लखनऊ अग्निकांड के बाद सवालों की बौछार, संसद से बुलडोजर कार्रवाई तक तेज हुई सियासत

लखनऊ अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार और प्रशासन से जवाब मांगा है, वहीं अवैध इमारत पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो गई है।

 

15 जिंदगियों को निगलने वाले लखनऊ अग्निकांड के बाद अब कहानी सिर्फ आग तक सीमित नहीं रह गई है। हादसे के बाद एक तरफ जांच एजेंसियां सक्रिय हैं, तो दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारों में जवाबदेही को लेकर सवालों की बौछार शुरू हो गई है। इसी बीच उस इमारत को गिराने की तैयारी भी शुरू हो गई है, जिसमें आग लगने से छात्रों की मौत हुई थी। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने बड़े हादसे के पीछे जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

 

लखनऊ अग्निकांड को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने एसआईटी के गठन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि ऐसे कदम वास्तविक जिम्मेदारियों से ध्यान भटकाने के लिए उठाए जाते हैं। वहीं समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि घायलों का समुचित इलाज हो और यह भी जांच हो कि दमकल की गाड़ियां समय पर क्यों नहीं पहुंचीं।

 

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घटना में बाराबंकी के एक छात्र की मौत का जिक्र करते हुए कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने कहा कि यह मामला संसद में उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि राजधानी में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर ऐसे सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरे जिलों की स्थिति को लेकर भी गंभीर समीक्षा की आवश्यकता है।

 

हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने उस इमारत को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एलडीए के अनुसार, रिहायशी उपयोग के लिए स्वीकृत भवन का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इसी को आधार बनाते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी गई है।

 

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक ऐसे बिंदु की ओर ध्यान दिलाया, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वर्ष 2016 में इमारत को खतरनाक मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया गया था, तो फिर एक दशक बाद भी वह इमारत कैसे खड़ी रही। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

 

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संजय सिंह ने यह भी कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार लोग मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन राहत और बचाव समय पर नहीं पहुंच सका। उन्होंने प्रदेश के फायर विभाग की व्यापक समीक्षा कराने की मांग की और संसाधनों, उपकरणों तथा मानवबल की उपलब्धता की जांच की आवश्यकता बताई।

 

समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने कहा कि यह जांच होना जरूरी है कि आग लगने के बाद दमकल विभाग की गाड़ियां समय पर क्यों नहीं पहुंचीं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

समाजवादी पार्टी सांसद राजीव राय ने घटना को भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला बताते हुए बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में शॉर्ट सर्किट और बिजली से जुड़ी घटनाओं के कारण हजारों लोगों की मौत हुई है और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर खामियां मौजूद हैं।

 

विपक्षी नेताओं के कई बयान एक बिंदु पर जाकर मिलते दिखाई दिए जवाबदेही। अजय राय से लेकर संजय सिंह तक, विभिन्न नेताओं ने एसआईटी जांच के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई की मांग की है।

 

अब आगे क्या?

एलडीए द्वारा ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं एसआईटी जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आने वाले दिनों में कई और तथ्य सामने आने की संभावना है। इसके साथ ही यह मामला संसद में भी गूंज सकता है।

 

 


 

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