>राजधानी लखनऊ ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में पूरे देश में अव्वल स्थान हासिल कर बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है। इस योजना की सफलता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि महज छह माह के भीतर 32,230 आवेदन आए और इनमें से 17,717 घरों की छतों पर सोलर पैनल लग चुके हैं।
>लखनऊ ने गुजरात और महाराष्ट्र जैसे औद्योगिक राज्यों के कई बड़े शहरों को पीछे छोड़ते हुए भारत का नंबर-1 शहर बनकर नई मिसाल कायम की है। वहीं, वाराणसी टॉप-10 सूची में 10वें नंबर पर है।
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पहला स्थान – लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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दूसरा स्थान – सूरत (गुजरात)
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तीसरा स्थान – नागपुर (महाराष्ट्र)
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चौथे से छठे स्थान तक – अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा (गुजरात)
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सातवां – एमाकुलम (केरल)
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आठवां – जयपुर (राजस्थान)
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नौवां – जलगांव (महाराष्ट्र)
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दसवां – वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
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>मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अधिशासी अभियंता जे.पी. शर्मा के अनुसार, सरकारी सब्सिडी और बढ़ती जागरूकता से उपभोक्ताओं में तेजी से सोलर पैनल लगाने की होड़ लगी है। योजना के तहत कुल लागत का बड़ा हिस्सा सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खातों में सब्सिडी के रूप में भेजा जा रहा है।
>सौर ऊर्जा से हर घर का बिजली खर्च लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक घट गया है, जिससे आम लोगों के बजट पर सीधा असर पड़ा है।
>लखनऊ में वर्ष 2019 से 2024 तक कुल 10,092 रूफटॉप सोलर कनेक्शन ही हुए थे। लेकिन सब्सिडी मिलने के बाद यह आंकड़ा सिर्फ छह माह में 17,717 तक पहुंच गया, जो योजना की अभूतपूर्व सफलता को दर्शाता है।
>सब्सिडी का लाभ (1KW से 10KW तक)
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1 किलोवाट पर कुल लाभ – ₹45,000
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2 किलोवाट पर – ₹90,000
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3 किलोवाट पर – ₹1,08,000
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5 किलोवाट पर – ₹1,08,000
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10 किलोवाट तक – ₹1,08,000 (निश्चित सीमा)
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>(ये जानकारी बिजली विभाग द्वारा उपलब्ध करवाई गयी है)
>मध्यांचल क्षेत्र के 19 जिलों में 86 लाख से अधिक घरेलू उपभोक्ता हैं। इनमें से सरकार ने 5.5 लाख घरों में 2027 तक सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य रखा है। अभी तक ही लगभग सवा तीन लाख इंस्टॉलेशन पूरे हो चुके हैं।
>इस उपलब्धि के साथ, लखनऊ सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए ग्रीन एनर्जी मॉडल बनता जा रहा है।
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