नोएडा में हाल ही में हुई श्रमिक अशांति और हिंसा के मामले में पुलिस ने डिजिटल साजिश का खुलासा किया है। गौतमबुद्धनगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस घटनाक्रम में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई।
पुलिस के अनुसार, 13 तारीख को स्थिति नियंत्रण में आने के बाद दो सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए ‘फॉल्स नैरेटिव’ फैलाया गया। मीर इल्यासी और ‘आयुषी तिवारी नाम के ये हैंडल पिछले तीन महीनों से सक्रिय थे और भ्रामक सूचनाओं के जरिए माहौल को प्रभावित किया गया।
जांच में राष्ट्रवादी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़े तीन मुख्य आरोपियों के नाम सामने आए हैं। इनमें रुपेश रॉय और मनीषा चौहान को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि आदित्य आनंद फरार बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी घटना के दौरान नोएडा में मौजूद थे और कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देकर स्थिति को और तनावपूर्ण बना रहे थे।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि हिंसा फैलाने के लिए QR कोड के माध्यम से गुप्त रूप से व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए। इसके अलावा, पहचान छिपाने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल भी किया गया। पुलिस ने अब तक 13 मुकदमे दर्ज किए हैं और 62 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
फिलहाल नोएडा और ग्रेटर नोएडा में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। अधिकांश औद्योगिक इकाइयां फिर से चालू हो गई हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा लगातार फ्लैग मार्च किया जा रहा है।
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