उत्तर प्रदेश सरकार से सहायता प्राप्त लखनऊ के नरही स्थित विद्या मंदिर गर्ल्स हाई स्कूल को खाली कराने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शनिवार को विद्यालय परिसर के बाहर छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन से जुड़े लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने विद्यालय को बचाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विद्यालय परिसर को प्रशासनिक कार्रवाई के तहत खाली कराया गया, जिससे छात्राओं की पढ़ाई और विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
प्रदर्शन के दौरान इंस्पायर अवार्ड विजेता कक्षा नौ की छात्रा तनीशा ने जिलाधिकारी से भावुक अपील की। उसने कहा कि विद्यालय में पढ़ने वाली अधिकांश छात्राएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं और स्कूल को बचाया जाना चाहिए। तनीशा ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा विद्यालय पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है और यह केवल भवन का नहीं बल्कि छात्राओं के भविष्य का भी सवाल है।
विद्यालय की प्रबंधिका संतोष रस्तोगी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्राएं, शिक्षिकाएं, कर्मचारी और अभिभावक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ग्रीष्मावकाश के दौरान पुलिस की मौजूदगी में विद्यालय परिसर को खाली कराया गया। उनका कहना है कि इस दौरान विद्यालय के अभिलेख, फर्नीचर, कंप्यूटर, पंखे और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी परिसर से बाहर निकाल दी गई। प्रबंधन का दावा है कि इससे विद्यालय के शैक्षणिक माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
विरोध प्रदर्शन को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के कई पदाधिकारियों का समर्थन मिला। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी, महासचिव आशीष कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष नंद कुमार मिश्र और प्रचार मंत्री जेके यादव सहित अन्य पदाधिकारी प्रदर्शन में शामिल हुए। इसके अलावा शिक्षक संघ के शर्मा गुट की ओर से महासचिव नरेन्द्र कुमार वर्मा, जिलाध्यक्ष अनिल शर्मा और जिलामंत्री महेश चंद ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। आशीष कुमार सिंह ने कहा कि विद्यालय और उससे जुड़े लोगों के हितों की अनदेखी हुई है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मध्य विधानसभा क्षेत्र के विधायक और पूर्व मंत्री रविदास मेहरोत्रा भी विद्यालय प्रबंधन के समर्थन में सामने आए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को जल्द बहाल किया जाना चाहिए ताकि छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि वर्ष 1936 में स्थापित इस विद्यालय को बंद करने की कोशिश की जा रही है और 243 छात्राओं के भविष्य से जुड़ा यह मामला गंभीर है।
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