मुख्तार के करीबी जफर उर्फ चंदा को अदालत से झटका, गाजीपुर की कुर्क संपत्ति रहेगी जब्त

गैंगस्टर एक्ट मामले में विशेष अदालत ने संपत्ति मुक्त करने की अर्जी खारिज की, वैध आय के पर्याप्त साक्ष्य न होने का उल्लेख।

 

गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के करीबी माने जाने वाले जफर उर्फ चंदा को अदालत से राहत नहीं मिली है। बाराबंकी की विशेष गैंगस्टर अदालत ने गाजीपुर में कुर्क की गई उसकी संपत्ति को मुक्त करने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि प्रस्तुत तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर अर्जी स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है।

 

मामला उस एंबुलेंस से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जेल से विभिन्न पेशियों पर लाने-ले जाने के लिए किया जाता था। जांच के दौरान यह एंबुलेंस बाराबंकी में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकृत पाई गई थी। मामले का खुलासा 31 मार्च 2021 को हुआ था, जिसके बाद तत्कालीन एआरटीओ पंकज कुमार सिंह की ओर से 2 अप्रैल 2021 को जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराया गया था।

 

इसके बाद 25 मार्च 2022 को मुख्तार अंसारी, जफर उर्फ चंदा समेत 13 लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। प्रशासन ने जफर उर्फ चंदा की गाजीपुर स्थित संपत्ति को गैंगस्टर एक्ट की धाराओं के तहत कुर्क कर लिया था।

 

अदालत में दाखिल अर्जी में जफर उर्फ चंदा ने दावा किया था कि विवादित संपत्ति वर्ष 2015 में खरीदी गई थी। उसका कहना था कि उसने अपने हिस्से की राशि वैध स्रोतों से अर्जित धन से अदा की थी। अर्जी में यह भी कहा गया कि उसके पिता नगर पालिका परिषद मुहम्मदाबाद में लिपिक थे और उनकी मृत्यु के बाद प्राप्त धनराशि तथा कृषि कार्य से हुई आय के आधार पर उसने संपत्ति खरीदी थी।

 

जफर उर्फ चंदा ने यह भी तर्क दिया कि संपत्ति का वर्तमान मूल्यांकन मौजूदा बाजार दरों के आधार पर किया गया है, जबकि खरीद के समय उसका मूल्य काफी कम था। उसने पुलिस पर तथ्यों और साक्ष्यों के बिना गलत रिपोर्ट भेजकर संपत्ति कुर्क कराने का आरोप लगाया था।

 

हालांकि, सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश विनय आर्या ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट के तहत अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को कुर्क किया जा सकता है। अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि जफर उर्फ चंदा के खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और उसने संपत्ति के स्व-अर्जित होने के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं।

 

कोर्ट ने उपलब्ध अभिलेखों, पुलिस रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद संपत्ति को कुर्की से मुक्त करने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी। इसके साथ ही गाजीपुर स्थित संपत्ति पर कुर्की की कार्रवाई यथावत रहने का रास्ता साफ हो गया है।


 

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