सब्जियों का राजा बनेगा रिसर्च का सिरमौर

अब और इतराएगा ‘सब्जियों का राजा’: आगरा में खुलेगा इंटरनेशनल पोटैटो रिसर्च सेंटर, योगी सरकार ने दी ज़मीन, केंद्र ने दी मंजूरी


>आलू, जिसे सब्जियों का राजा कहा जाता है, अब वैज्ञानिक शोध और नवाचार के क्षेत्र में भी अपनी ‘राजसी उपस्थिति’ दर्ज कराने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के आगरा में जल्द ही CIP (इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर) का क्षेत्रीय केंद्र खुलेगा, जिसकी स्थापना के लिए योगी सरकार ने 10 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 111.50 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।


>पेरू की राजधानी लीमा स्थित अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CIP) का यह आगरा केंद्र पूरे दक्षिण एशिया के लिए कार्य करेगा और विशेष रूप से आलू पर केंद्रित वैश्विक शोध और इन्नोवेशन को उत्तर भारत में जमीन पर उतारेगा।

क्या होगा इस अंतरराष्ट्रीय केंद्र में?


  • >उच्च उपज वाली और रोग प्रतिरोधक प्रजातियों का विकास होगा

  • >अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बीजों की खोज होगी
  • आलू की पोषण क्षमता को बढ़ाने पर काम होगा

  • >अन्य कंदवर्गीय सब्जियों (जैसे शकरकंद, अरबी आदि) को भी लाभ मिलेगा

उत्तर प्रदेश: देश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य


>उत्तर प्रदेश देश का 35% से अधिक आलू उत्पादन करता है। औसतन 23-25 टन प्रति हेक्टेयर की उपज है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। प्रमुख उत्पादक जिले मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, इटावा, बदायूं, मैनपुरी, कन्नौज और फर्रुखाबाद हैं। सिर्फ छह मंडलों में ही यूपी का 75% से ज्यादा उत्पादन होता है।

CIP क्यों है ज़रूरी?


>अब तक शिमला, मेरठ और पटना स्थित केंद्रों के जरिए शोध होते रहे हैं, लेकिन वो किसानों तक समय से पहुंच नहीं पाते। बीज की कमी और जानकारी का अभाव किसानों की आम समस्या रही है। ऐसे में आगरा, सहारनपुर और कुशीनगर में बनने वाले Excellence Centers एक नया आयाम देंगे।


>डॉ. एस.पी. सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, गोरखपुर के अनुसार, इन केंद्रों से किसानों को:

  • उन्नत किस्मों की जानकारी
  • स्थानीय स्तर पर बीज की उपलब्धता

  • >अधिक तापमान सहनशील और कम समय में पकने वाली प्रजातियों जैसे कुफरी शौर्या, ख्याति और चिपसोना का लाभ
  • बाजार की मांग के अनुसार खेती के अवसर मिलेंगे।

दुनिया से सीख, देश में विकास


>नीदरलैंड, बेल्जियम, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड जैसे देश प्रति हेक्टेयर 38 से 44 मीट्रिक टन आलू उपजाते हैं। अब यही तकनीक और किस्में भारत में भी किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी।

पोषण से भरपूर है आलू


>आलू में मौजूद पोषक तत्व जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन C, B6, पोटैशियम, मैग्नीशियम इत्यादि न केवल इसे ऊर्जा का अच्छा स्रोत बनाते हैं, बल्कि यह रोग प्रतिरोधक क्षमता, हृदय स्वास्थ्य और पाचन क्रिया में भी सहायक होता है।


 

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