उत्तर प्रदेश की राजनीति में आजम खान की रिहाई ने नई हलचल मचा दी है। मुरादाबाद से पूर्व सांसद एसटी हसन ने खुलकर अपने दिल की बात कही। उन्होंने कहा कि उन्हें आजम खान के जेल से बाहर आने की खुशी है, लेकिन उनके साथ जो कुछ हुआ, उससे उनका पुराना सियासी दर्द उभरकर सामने आ गया।
एसटी हसन ने कहा, “अगर आजम खान बहुजन समाज पार्टी में चले भी गए, तो समाजवादी पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा। मुस्लिम वोट बैंक, जो सपा का कोर वोट है, वह सपा से अलग किसी और के पास नहीं जाएगा। यह मेरे लिए स्पष्ट है।”
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वे आजम खान से मिलने जाएंगे, तो उन्होंने भावुक होकर कहा, “मेरा दिल नहीं चाहता कि मैं उनके पास जाऊं। मेरे साथ जो हुआ, उसकी वजह आजम खान हैं। अगर उनका आदेश आया तो जाऊंगा, लेकिन फिलहाल मेरा मन नहीं है।”
लोकसभा चुनाव 2024 के संदर्भ में एसटी हसन ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “मेरे साथ क्या-क्या हुआ, पूरा मीडिया एक हफ्ते तक इसे लगातार चला रहा था। सब जानते हैं मेरे साथ क्या हुआ। यह मेरे लिए व्यक्तिगत और सियासी दोनों दृष्टि से एक कठिन अनुभव था।”
एसटी हसन की यह टिप्पणी न सिर्फ उत्तर प्रदेश की सियासी दुनिया में हलचल पैदा कर रही है, बल्कि यह भी दिखाती है कि चुनावी रणनीति और व्यक्तिगत मतभेद किस हद तक राजनीतिक रिश्तों को प्रभावित कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए, इस तरह के बयान सियासी पार्टियों के लिए रणनीति पर असर डाल सकते हैं। आजम खान की रिहाई और उसके बाद सियासी दलों के बीच समीकरण भी इन टिप्पणियों के चलते नई दिशा ले सकते हैं।
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