अम्बेडकरनगर के अकबरपुर स्थित बी.एन.के.बी. पीजी कॉलेज में शनिवार को ‘उच्च शिक्षा सेवा संकल्प अभियान’ के तहत ‘नमो सेवा कहानियाँ’ रील मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता की थीम ‘छोटी कहानियाँ, बड़ा बदलाव’ रखी गई थी। इसमें छात्र-छात्राओं ने सेवा भावना, सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक बदलाव से जुड़ी कहानियों को डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रील के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रस्तुतियों में सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कहानियों के साथ युवा शक्ति और विकसित भारत @2047 की संकल्पना भी दिखाई दी।
बी.एन.के.बी. पीजी कॉलेज में आयोजित रील मेकिंग प्रतियोगिता का केंद्र छोटी कहानियों के माध्यम से सामाजिक बदलाव और सेवा भावना को प्रस्तुत करना रहा। विद्यार्थियों ने डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करते हुए अपने विचारों और कहानियों को रचनात्मक अंदाज में पेश किया। प्रतियोगिता के दौरान छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों में सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक परिवर्तन से जुड़े विषय दिखाई दिए। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता को डिजिटल माध्यम में प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
प्रतियोगिता में शामिल छात्र-छात्राओं ने सेवा भावना और सामाजिक बदलाव से जुड़ी कहानियों को रील के रूप में प्रस्तुत किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक परिवर्तन से जुड़े विषयों को रचनात्मक तरीके से सामने रखा गया। रील मेकिंग के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में डिजिटल माध्यम के जरिए विचारों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के पहलू पर भी जोर रहा।
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कार्यक्रम के दौरान डॉ. आलोक तिवारी ने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, डिजिटल समावेशन और रील मेकिंग की तकनीकों के बारे में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से जुड़ी रचनात्मक गतिविधियों के संदर्भ में जानकारी दी। रील मेकिंग प्रतियोगिता के आयोजन के बीच विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल और अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों को तैयार करने से जुड़े पहलुओं पर मार्गदर्शन मिला। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और डिजिटल समावेशन से जुड़े विषयों को कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के मार्गदर्शन का हिस्सा बनाया गया।
कार्यक्रम में डॉ. धनंजय मौर्य ने विद्यार्थियों को नवीन तकनीकों और कौशल को अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्रतियोगिता के डिजिटल स्वरूप को देखते हुए तकनीकी कौशल और रचनात्मक अभिव्यक्ति विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का हिस्सा रही। रील मेकिंग जैसी डिजिटल गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को अपने विचारों को छोटे और रचनात्मक वीडियो प्रारूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिला। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की भागीदारी ने कार्यक्रम के रचनात्मक और डिजिटल पक्ष को सामने रखा।
प्रतियोगिता में युवाओं ने सामाजिक उत्तरदायित्व, सेवा और सकारात्मक परिवर्तन से संबंधित कहानियों को रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में युवा शक्ति और विकसित भारत @2047 की संकल्पना भी नजर आई। इस दौरान छात्रों ने डिजिटल माध्यम के जरिए अपने विचारों को प्रस्तुत किया और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को रील के रूप में सामने रखा।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पार्चन के साथ हुई। इसके बाद विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और प्रतियोगिता से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम में महाविद्यालय से जुड़े प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। आयोजन में विद्यार्थियों की भागीदारी प्रमुख रही।
कार्यक्रम का संचालन संतोष वर्मा ने किया, जबकि सुधीर मिश्रा ने स्वागत एवं संयोजन की जिम्मेदारी संभाली। आयोजन के दौरान महाविद्यालय के प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की मौजूदगी रही। प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने डिजिटल माध्यम के जरिए सेवा और सामाजिक बदलाव से संबंधित अपनी प्रस्तुतियां दीं।
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