70 लाख पौधे, 100 ऑक्सीजन पार्क और 185 एकड़ ग्रीन जोन, दिल्ली के लिए नई पर्यावरण योजना

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया 18 नमो ऑक्सीजन पार्कों का शिलान्यास, स्वदेशी वृक्षों से विकसित होंगे हरित क्षेत्र।

 

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और हरित क्षेत्र के विस्तार की दिशा में एक नई पहल करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को मैदानगढ़ी में वृक्षारोपण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर राजधानी के विभिन्न हिस्सों में 18 नमो ऑक्सीजन पार्कों का शिलान्यास भी किया गया। सरकार का कहना है कि यह परियोजना दिल्ली की आबोहवा को बेहतर बनाने और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

 

100 ऑक्सीजन पार्क विकसित करने की योजना: कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार मिलकर राजधानी में 100 ऑक्सीजन पार्क विकसित करने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और शहरीकरण के बीच हरित क्षेत्रों का विस्तार समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री के अनुसार इन पार्कों का उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दीर्घकालिक संरक्षण और पर्यावरणीय सुधार भी इसका हिस्सा होंगे।

 

स्वदेशी प्रजातियों के वृक्ष होंगे विशेष पहचान: सरकार के मुताबिक नमो ऑक्सीजन पार्क सामान्य पार्कों से अलग होंगे। इनमें केवल स्वदेशी प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से पीपल, बरगद, जामुन, आम जैसे वृक्ष शामिल होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार ये वृक्ष स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए उपयोगी माने जाते हैं और जैव विविधता को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।

 

185.42 एकड़ भूमि को बनाया जाएगा ग्रीन जोन: 18 नमो ऑक्सीजन पार्कों के तहत कुल 185.42 एकड़ भूमि को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इन क्षेत्रों में वृक्षारोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण और रखरखाव की भी व्यवस्था की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ऐसे हरित क्षेत्रों का विकास करना है जो आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय सुधार में योगदान दे सकें।

 

70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली सरकार ने चालू वर्ष के दौरान 70 लाख पेड़-पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पार्क की देखरेख के लिए स्थानीय स्तर पर विशेष केयर-टेकिंग समितियों का गठन किया जाएगा। ये समितियां पार्कों के संरक्षण, रखरखाव और निगरानी का कार्य संभालेंगी।

 

पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी पर जोर: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। उन्होंने लोगों की भागीदारी को आवश्यक बताते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों को प्रकृति संरक्षण के प्रयासों से जुड़ना चाहिए। उनके अनुसार ऐसे कार्यक्रम पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने में मददगार हो सकते हैं।

 

दिल्ली बर्ड एटलस का भी हुआ विमोचन: कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण से जुड़े तीन महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और नीतिगत दस्तावेजों का भी लोकार्पण किया गया। इनमें दिल्ली बर्ड एटलस प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा। इस परियोजना में योगदान देने वाले विभिन्न संगठनों, पर्यावरणविदों और पक्षी विशेषज्ञों को सम्मानित भी किया गया। 

 

धूल-मुक्त दिल्ली अभियान की प्रदर्शनी: समारोह में 'धूल-मुक्त दिल्ली अभियान' पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें प्रदूषण नियंत्रण, हरित विकास और स्वच्छ वातावरण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और प्रयासों की जानकारी दी गई।


 

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