Lucknow News: राजधानी लखनऊ में नगर निगम की टीम ने रविवार सुबह कैसरबाग कचहरी के पास स्थित वकीलों के अवैध चैंबरों को हटाने के लिए बुलडोजर की कार्रवाई की। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर तैनात रही। नगर निगम की इस कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ गया। उच्च न्यायालय के आदेश पर नगर निगम की टीम अवैध चैंबरों को ध्वस्त करने के लिए मौके पर पहुंची तो वकीलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। नगर निगम ने इस बार कुल 245 चैंबरों को चिह्नित करते हुए लाल निशान लगाया था और नंबर भी दर्ज किए गए हैं। संबंधित चैंबरों के संचालकों को पूर्व में ही नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।
नगर निगम के चैंबरों पर बुलडोलर की कार्रवाई से नाराज वकीलों का कहना है कि वे बीते 15 से 20 सालों से इन चैंबरों में बैठ रहे और प्रैक्टिस कर रहे हैं। अब इन्हें अवैध करार देते हटाया जा रहा है। चैंबरों को हटाने से उनके कामकाज और आजीविका पर भी असर पड़ेगा। वकीलों ने आगे कहा कि अगर उच्च न्यायालय के आदेश के तहत चैंबरों को इतना ही जरूरी है, तो फिर प्रशासन को चैंबरों को हटाने से पहले वकीलों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
वकीलों का यह भी कहना है कि वे कार्रवाई का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि अपने बैठने और काम करने के लिए उचित जगह की मांग कर रहे हैं। नगर निगम ने चिह्नित चैंबरों पर लाल निशान लगा उनकी पहचान दर्ज की है। नोटिस जारी करने के बाद अब इन्हें हटाने की कार्रवाई की जा रही है। जब नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची, तो बड़ी संख्या में वकील एकत्र हो गए और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
अवैध चैंबरों को हटाने को लेकर वकीलों की प्रमुख मांग है कि चैंबरों पर बुलडोजर की कार्रवाई करने से पहले उनके बैठने और वकालत करने के लिए दूसरी जगह की व्यवस्था की जाए। वकीलों को स्पष्ट कहना है कि काफी लंबे समय से वह इन चैंबरों में बैठ रहे हैं और प्रैक्टिस कर रहे हैं। प्रशासन को चैंबरों को हटाने से पहले वकीलों के हितों और आजीविका को भी ध्यान में रखना चाहिए।
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