लखनऊ, 20 सितंबर। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के पीडीए नारे को लेकर उन पर निशाना साधा है। राजभर ने पीडीए को 'पूरी तरह ढकोसला' करार देते हुए आरोप लगाया कि सपा अध्यक्ष इसकी व्याख्या राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से बदलते रहते हैं।
राजभर ने दलित राजनीति को लेकर भी अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर कई आरोप लगाए। उन्होंने वर्ष 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के कार्यकाल, डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं से जुड़ी घटनाओं और 2 जून 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस प्रकरण का उल्लेख किया। उनके कई आरोप राजनीतिक दावे हैं और दिए गए बयान में इनके समर्थन में स्वतंत्र आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए गए।
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव पीडीए का अर्थ अपनी सुविधा के अनुसार बदलते रहे हैं। उनके मुताबिक कभी पीडीए को पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक बताया जाता है, जबकि अलग-अलग मौकों पर इसके अक्षरों को पंडित, दलित, अहीर, अल्पसंख्यक, आधी आबादी और अगड़ा जैसे वर्गों से भी जोड़ा गया है। इसी आधार पर राजभर ने पीडीए की राजनीति पर सवाल उठाते हुए इसे 'पूरी तरह ढकोसला' बताया।
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पीडीए समाजवादी पार्टी की मौजूदा राजनीतिक रणनीति के प्रमुख नारों में शामिल है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इसे लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार अहम होती जा रही है। राजभर ने अखिलेश यादव पर दलितों और दलित महापुरुषों के प्रति विरोधी रवैया रखने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि 2012 से 2017 के बीच समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने की कई घटनाएं हुई थीं।
उन्होंने जौनपुर, मऊ, सीतापुर और आजमगढ़ समेत कई जिलों का उल्लेख किया। राजभर ने यह भी दावा किया कि सपा सरकार के कार्यकाल में दलितों पर अत्याचार के मामले बढ़े थे। ये राजभर की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। उनके बयान में इन दावों से संबंधित कोई विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया। सुभासपा अध्यक्ष ने अपने बयान में आगरा की एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सपा सरकार के दौरान एक दलित ग्राम प्रधान की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।
राजभर ने दावा किया कि ग्राम प्रधान ने समाजवादी पार्टी को वोट नहीं दिया था और इसी कारण उनके साथ हिंसा की गई। उन्होंने इस घटना को सपा शासन के दौरान दलितों की स्थिति से जोड़ते हुए पार्टी पर सवाल उठाए। राजभर ने उत्तर प्रदेश में दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामलों को लेकर यादव और मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों पर भी आरोप लगाए और उन्हें समाजवादी पार्टी के मतदाताओं से जोड़ा। इस दावे के समर्थन में उनके बयान में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया गया।
राजभर ने अपने बयान में बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती और 2 जून 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग मायावती पर हमला करना चाहते थे। राजभर ने दावा किया कि भाजपा नेताओं के मौके पर पहुंचने के बाद मायावती की जान बच सकी। 2 जून 1995 का लखनऊ गेस्ट हाउस प्रकरण उत्तर प्रदेश की राजनीति का चर्चित घटनाक्रम रहा है। उस समय सपा और बसपा के बीच गठबंधन टूटने के बाद लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में मायावती और बसपा नेताओं के साथ दुर्व्यवहार और हिंसा की घटना सामने आई थी। राजभर ने इसी घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव की मौजूदा दलित राजनीति पर सवाल उठाए।
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के नीले गमछे को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर को आगे रखकर दलित मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। राजभर ने कहा, "यही नीला गमछा उनके गले की फांस है। सिर पर लाल टोपी और गले में नीला गमछा दो जून 1995 की घटना की याद दिलाता है कि गेस्ट हाउस कांड में सपा ने मायावती के साथ क्या किया था।" उन्होंने इस प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश को 1995 के गेस्ट हाउस प्रकरण से जोड़ते हुए समाजवादी पार्टी की दलित राजनीति पर सवाल उठाया।
राजभर ने पूर्ववर्ती सपा सरकार के दौरान प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के शासनकाल में प्रमोशन में आरक्षण समाप्त किया गया और दलित महापुरुषों तथा बाबा साहब डॉ. आंबेडकर के नाम से जुड़े पार्कों, जिलों और योजनाओं को लेकर ऐसे फैसले किए गए, जिनसे उनकी पहचान प्रभावित हुई। राजभर ने दावा किया कि दलितों के उत्थान और विकास के लिए महापुरुषों के नाम से चलाई गई कई योजनाओं को भी पूर्ववर्ती सरकार ने समाप्त किया था।
राजभर ने मौजूदा योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार महापुरुषों से जुड़े स्मारकों और पार्कों के संरक्षण पर काम कर रही है। उनके अनुसार, महापुरुषों के नाम पर बने पार्कों में पुरानी प्रतिमाओं को बदलने, बाउंड्री बनवाने और अन्य सौंदर्यीकरण कार्यों के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर काम शुरू हो चुका है। राजभर ने इसे दलित महापुरुषों और अन्य सामाजिक नायकों को सम्मान देने की मौजूदा सरकार की नीति से जोड़ा।
ओम प्रकाश राजभर ने अपने बयान में वर्ष 2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव जिस राजनीतिक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं, उसे चुनाव में सफलता नहीं मिलेगी। यह राजभर का राजनीतिक दावा है। उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित है और उससे पहले पीडीए, दलित प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरण जैसे मुद्दे विभिन्न दलों की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बने हुए हैं। राजभर का ताजा बयान भी इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने पीडीए की अवधारणा से लेकर सपा के पिछले शासनकाल और 1995 के गेस्ट हाउस प्रकरण तक कई मुद्दों को उठाया है।
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