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UP NEET UG 2026 काउंसलिंग रद्द, SC-ST छात्रों के लिए चंद्रशेखर आजाद की बड़ी मांग

14 से 17 सितंबर तक प्रस्तावित दूसरे चरण की काउंसलिंग रद्द होने के बाद पहले सीट पा चुके अभ्यर्थियों को भी दोबारा विकल्प भरकर सीट लॉक करनी होगी।
Bureau
Bureau News Desk
19 Sep 2026
12:42 PM
1 min read
UP NEET UG 2026 काउंसलिंग रद्द, SC-ST छात्रों के लिए चंद्रशेखर आजाद की बड़ी मांग
हाइलाइट्स
यूपी नीट यूजी 2026 की एमबीबीएस और बीडीएस काउंसलिंग प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।
दूसरे चरण की काउंसलिंग 14 से 17 सितंबर तक प्रस्तावित थी।
मामला अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेजों से जुड़ा है।
चंद्रशेखर आजाद ने एससी-एसटी विद्यार्थियों की विशेष सीट व्यवस्था को स्थायी कानूनी संरक्षण देने की मांग की है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नीट यूजी 2026 के तहत एमबीबीएस और बीडीएस प्रवेश के लिए चल रही काउंसलिंग प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। चार राजकीय मेडिकल कॉलेजों में एससी-एसटी विद्यार्थियों के लिए सीट व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया रद्द कर नए सिरे से शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम के बीच भीम आर्मी प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इन मेडिकल कॉलेजों में एससी-एसटी विद्यार्थियों के लिए विशेष सीट व्यवस्था को स्थायी कानूनी संरक्षण देने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश की आधिकारिक नीट काउंसलिंग वेबसाइट पर 2026 की एमबीबीएस और बीडीएस काउंसलिंग से संबंधित संशोधित सीट मैट्रिक्स, राज्य मेरिट सूची और दूसरे चरण की काउंसलिंग से जुड़े नोटिस जारी किए गए हैं। वेबसाइट पर अंबेडकरनगर, जालौन, कन्नौज और सहारनपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज भी काउंसलिंग संस्थानों की सूची में शामिल हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यूपी नीट यूजी 2026 के तहत एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दूसरे चरण की काउंसलिंग 14 सितंबर से शुरू होकर 17 सितंबर तक प्रस्तावित थी। इसी प्रक्रिया के दौरान चार राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सीट व्यवस्था से जुड़ा न्यायिक मामला सामने आया। काउंसलिंग प्रक्रिया प्रभावित होने के बाद पहले से सीट हासिल कर चुके अभ्यर्थियों को भी दोबारा विकल्प भरने और सीट लॉक करने की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इससे उन अभ्यर्थियों की काउंसलिंग प्रक्रिया भी दोबारा प्रभावित होगी, जिन्होंने पहले चरण में सीट हासिल कर ली थी। आधिकारिक यूपी नीट पोर्टल पर 2026 की काउंसलिंग के लिए पंजीकरण, सुरक्षा शुल्क, विकल्प भरने और सीट आवंटन से संबंधित अलग-अलग ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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यह मामला उत्तर प्रदेश के चार राजकीय मेडिकल कॉलेजों से संबंधित है। इनमें राजकीय मेडिकल कॉलेज, अंबेडकरनगर, राजकीय मेडिकल कॉलेज, कन्नौज, राजकीय मेडिकल कॉलेज, जालौन, राजकीय मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर शामिल हैं यूपी नीट की आधिकारिक संस्थान सूची में चारों मेडिकल कॉलेज राजकीय संस्थानों के रूप में दर्ज हैं। इन कॉलेजों में सीट आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवाद नया नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में भी अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर स्थित चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एससी आरक्षण की सीमा से संबंधित मामला दर्ज है।

मामला इन चार मेडिकल कॉलेजों में एससी-एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए लागू विशेष सीट व्यवस्था से संबंधित है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, इन कॉलेजों में आरक्षण व्यवस्था सामान्य राजकीय मेडिकल कॉलेजों से अलग व्यवस्था के आधार पर लागू की गई थी। 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल मामले में इन चार मेडिकल कॉलेजों में एससी के लिए 73 प्रतिशत, एसटी के लिए 6 प्रतिशत और ओबीसी के लिए 13 प्रतिशत सीट व्यवस्था को चुनौती दी गई थी। मामले में उत्तर प्रदेश में लागू सामान्य आरक्षण व्यवस्था के साथ इस विशेष व्यवस्था की वैधानिकता पर सवाल उठाया गया था। हाईकोर्ट की पूर्व न्यायिक कार्यवाही में यह भी दर्ज है कि इन चार मेडिकल कॉलेजों की स्थापना विशेष घटक योजना से जुड़े प्रावधानों के तहत हुई थी।

चंद्रशेखर आजाद ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में एससी-एसटी विद्यार्थियों की विशेष सीट व्यवस्था पर 16 सितंबर को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद एमबीबीएस और बीडीएस की प्रथम चरण की काउंसलिंग रद्द कर नए सिरे से शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि पहले सीट पा चुके अभ्यर्थियों को भी दोबारा विकल्प भरकर सीट लॉक करनी होगी।

आजाद के अनुसार, एक सितंबर को इन चार मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पूर्व की सीट व्यवस्था जारी रखने का उत्तर प्रदेश सरकार का निर्णय विद्यार्थियों के संघर्ष और एकजुटता का परिणाम था। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पिछले वर्ष से लगातार उठाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इन मेडिकल कॉलेजों की स्थापना में स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत प्राप्त धनराशि और एससी-एसटी विद्यार्थियों के लिए निर्धारित विशेष व्यवस्था का उल्लेख पूर्व की न्यायिक कार्यवाही में सरकारी पक्ष की ओर से किया गया था।

चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि इन चार मेडिकल कॉलेजों में एससी-एसटी विद्यार्थियों की विशेष सीट व्यवस्था को स्थायी कानूनी संरक्षण देने के लिए तत्काल अध्यादेश लाया जाए। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को केवल शासनादेश के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उनके अनुसार, विद्यार्थियों के भविष्य और उनके शैक्षणिक अधिकारों को लेकर अनिश्चितता नहीं होनी चाहिए। आजाद ने इस मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रहे विद्यार्थियों को अपना समर्थन देने की बात भी कही है।

काउंसलिंग प्रक्रिया में बदलाव की सूचना चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय की ओर से 17 सितंबर की शाम जारी होने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, छात्रों ने खाली सीटों के लिए आवेदन करने के साथ फीस भी जमा कर दी थी। इसके बाद हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के मद्देनजर काउंसलिंग प्रक्रिया स्थगित करने का फैसला लिया गया। इस घटनाक्रम का सीधा संबंध उन अभ्यर्थियों से भी है जिन्होंने काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेकर सीट के लिए विकल्प भरे थे। पहले से सीट हासिल कर चुके विद्यार्थियों को भी संशोधित प्रक्रिया के तहत दोबारा विकल्प भरने और उन्हें लॉक करने की जरूरत बताई गई है।

चारों मेडिकल कॉलेजों की सीट व्यवस्था को लेकर न्यायिक विवाद पहले भी सामने आ चुका है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के उपलब्ध रिकॉर्ड में इस मामले को मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आरक्षण की स्वीकार्य सीमा से संबंधित महत्वपूर्ण विवाद के रूप में दर्ज किया गया है। 2025 में इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष यह मुद्दा आया था कि इन चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू विशेष आरक्षण व्यवस्था उत्तर प्रदेश में लागू आरक्षण कानून के प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं। उपलब्ध न्यायिक विवरण में इन कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी के लिए लागू अलग-अलग प्रतिशत का उल्लेख किया गया है। न्यायिक रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि राज्य सरकार की ओर से अगले शैक्षणिक सत्र से आरक्षण संबंधी व्यवस्था को लागू कानून के अनुरूप करने की बात कही गई थी।

यूपी नीट की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 की काउंसलिंग से जुड़े कई अपडेट उपलब्ध हैं। इनमें पहले चरण की संशोधित सीट मैट्रिक्स, संशोधित राज्य मेरिट सूची, पहले चरण की काउंसलिंग का संशोधित कार्यक्रम और दूसरे चरण की काउंसलिंग से जुड़ी सूचनाएं शामिल हैं। आधिकारिक पोर्टल पर वर्तमान में अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण और विद्यार्थी लॉगिन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों के लिए आधिकारिक नोटिस और संशोधित कार्यक्रम की जानकारी यूपी नीट पोर्टल पर देखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि सीट मैट्रिक्स और काउंसलिंग कार्यक्रम में बदलाव होने की स्थिति में आगे की प्रक्रिया उसी के अनुसार निर्धारित होती है।

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