उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से जुड़े आठ जिलों में वायु प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को लखनऊ में बैठक की। बैठक में वाहन प्रदूषण, पुराने वाहनों, इलेक्ट्रिक बसों, औद्योगिक प्रदूषण, सड़क की धूल, ठोस कचरा और निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन सहित कई मुद्दों की समीक्षा की गई। बैठक मुख्यमंत्री के आवास पर हुई। अधिकारियों ने एनसीआर से जुड़े उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए चल रहे उपायों और कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। इनमें नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ और बुलंदशहर समेत अन्य एनसीआर जिले शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चर्चा का एक प्रमुख हिस्सा वाहनों से होने वाले प्रदूषण और पुराने वाहनों से जुड़े उपायों पर केंद्रित था। इलेक्ट्रिक वाहन नीति, इलेक्ट्रिक बसों, अनिवार्य प्रदूषण प्रमाणपत्र और एग्रीगेटर वाहनों से जुड़े विषयों पर भी विचार किया गया। उत्तर प्रदेश के आठ जिले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़े हैं। बैठक में इन जिलों में वायु प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों और उन्हें नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की गई।
बैठक का फोकस केवल वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन तक सीमित नहीं रहा। औद्योगिक इकाइयों, सड़क की धूल, ठोस कचरे और निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाले कचरे को भी चर्चा में शामिल किया गया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार एनसीआर से जुड़े जिलों में वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, धूल और कचरा प्रबंधन से जुड़े उपायों के लिए समन्वित योजना पर काम कर रही हैं।
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बैठक में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पुराने वाहनों से जुड़े उपायों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही राज्य की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति और इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। भूपेंद्र यादव ने बताया कि वाहनों के लिए प्रदूषण प्रमाणपत्र और एग्रीगेटर वाहनों से जुड़े नियमों तथा उनके अधिक प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। इस चर्चा का संबंध एनसीआर क्षेत्र में परिवहन से होने वाले प्रदूषण की निगरानी और नियंत्रण से है। बैठक में संबंधित विभागों द्वारा लागू किए जा रहे मौजूदा उपायों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
औद्योगिक प्रदूषण को लेकर बैठक में अधिकारियों ने बताया कि लगभग 80 प्रतिशत उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाए जा चुके हैं। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, बाकी औद्योगिक इकाइयों को भी इन व्यवस्थाओं के दायरे में लाने के लिए काम किया जा रहा है। ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के जरिए औद्योगिक इकाइयों के उत्सर्जन की निगरानी की जाती है। बैठक में औद्योगिक इकाइयों के अनुपालन की स्थिति और शेष इकाइयों को शामिल करने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई।
एनसीआर में वायु प्रदूषण के एक अन्य स्रोत के रूप में सड़क और निर्माण गतिविधियों से जुड़ी धूल पर भी बैठक में चर्चा हुई। इसके लिए यांत्रिक और गहरी सफाई की कार्ययोजना पर विचार किया गया। इसका उद्देश्य सड़कों और संबंधित क्षेत्रों में जमा धूल को नियंत्रित करना है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि धूल नियंत्रण से जुड़े उपायों का स्थानीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय जरूरी है।
बैठक में ठोस कचरा प्रबंधन नियम और निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम लागू करने से जुड़े मुद्दों की भी समीक्षा की गई। केंद्र और राज्य स्तर के संबंधित विभागों के साथ-साथ अन्य हितधारकों के साथ परामर्श कार्यक्रम आयोजित करने की बात भी सामने आई है, ताकि इन नियमों का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से किया जा सके। इसमें आवासीय सोसायटियों और अन्य संबंधित पक्षों को भी शामिल करने की बात कही गई है। स्थानीय स्तर पर नियमों के पालन और निगरानी की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई।
एनसीआर के वायु प्रदूषण में पराली जलाने का मुद्दा भी केंद्र की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। भूपेंद्र यादव ने बताया कि केंद्र सरकार संबंधित राज्यों के कृषि विभागों के साथ पराली प्रबंधन पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि हरियाणा और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के साथ इस विषय पर बैठकें हो चुकी हैं। राजस्थान और पंजाब के मुख्यमंत्रियों के साथ भी आगे चर्चा की योजना है। केंद्रीय स्तर पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ भी फसल अवशेष जलाने की समस्या से जुड़े मुद्दों पर समन्वय किए जाने की जानकारी दी गई।
भूपेंद्र यादव के अनुसार, एनसीआर क्षेत्र के नगर निगमों के लिए शहर-विशिष्ट कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि पिछले दिसंबर से वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विषयों पर 30 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि एनसीआर के 63 छोटे शहरों के पंचायतों, जिला परिषदों, नगर पालिकाओं और नगर निगमों के प्रमुखों के साथ बैठकें की गई हैं। स्थानीय स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था के तहत प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों को स्थानीय निकाय स्तर पर लागू करने और उनकी निगरानी करने पर जोर दिया जा रहा है।
बैठक के बाद भूपेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश में स्वच्छ वायु से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत राज्य में किए गए वृक्षारोपण की सराहना की। यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने निर्धारित वृक्षारोपण लक्ष्य से अधिक पौधे लगाए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य को 30 करोड़ पौधों का लक्ष्य दिया गया था, जबकि 35 करोड़ पौधे लगाए जाने की जानकारी दी गई। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के संदर्भ में भी उन्होंने उत्तर प्रदेश के शहरों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, 130 शहरों के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ पहले स्थान पर रहा और आगरा समेत उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों ने भी प्रदर्शन किया। यह केंद्रीय मंत्री का बैठक के बाद दिया गया बयान है।
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री ने वाहन प्रदूषण के संबंध में पुराने वाहनों, नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति, इलेक्ट्रिक बसों, प्रदूषण प्रमाणपत्र और एग्रीगेटर वाहनों को चर्चा के प्रमुख विषयों में बताया। औद्योगिक प्रदूषण के बारे में उन्होंने कहा कि लगभग 80 प्रतिशत उद्योगों में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाए जा चुके हैं और बाकी उद्योगों की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने धूल प्रदूषण के लिए यांत्रिक और गहरी सड़क सफाई की कार्ययोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने यह भी बताया कि एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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